Groundnut Farming Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। वाजिब दाम नहीं मिलने से जिले के किसानों का अब मक्का से मोहभंग होता जा रहा है। इससे मक्का के रकबे में लगातार कमी आ रही है। दूसरी ओर बीते साल कई जिलों की मूंग को जहरीली बताए जाने के बाद जिले में कोशिश यह हो रही है कि किसान ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती करने के बजाय मूंगफल्ली की खेती करें। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण देने के साथ ही नि:शुल्क बीज भी मुहैया कराए जा रहे हैं। इधर रबी फसलों की स्थिति देखें तो इस साल जिले में बुआई का लक्ष्य जनवरी के आखरी सप्ताह में ही पूरा हो गया है। जबकि अभी काफी समय बचा है। 

पिछले साल प्रदेश के कुछ जिलों में गर्मियों में ली जाने वाली मूंग की फसल जहरीली बताई गई थी। इसी के चलते पहले राज्य शासन ने इसकी समर्थन मूल्य पर खरीदी करने से ही इंकार कर दिया था। इसके बाद किसी तरह सरकार मानी और खरीदी हुई। इधर कृषि विभाग को आशंका थी कि वही कीटनाशक जिले में भी कुछ किसान उपयोग करने लगे हैं। ऐसे में विभाग यह कोशिश कर रहा है कि जिले में भी किसान यह जहरीली मूंग उपजाने के बजाय मूंगफल्ली की खेती करें। इसके लिए नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड प्रोग्राम के तहत प्रयास किए जा रहे हैं।

पांच ब्लॉकों के 471 किसान चिन्हित 

वर्तमान में पूरे जिले में मूंगफल्ली की खेती 237 हेक्टेयर में होती है। इस प्रोग्राम के तहत केवल 5 ब्लॉकों में 300 हेक्टेयर में मूंगफल्ली की खेती करवाई जाएगी। शाहपुर में 30 हेक्टेयर में 108 किसान, घोड़ाडोंगरी में 40 हेक्टेयर में 89 किसान, आठनेर में 100 हेक्टेयर में 100 किसान, प्रभातपट्टन में 80 हेक्टेयर में 103 किसान और भैंसदेही में 50 हेक्टेयर में 71 किसान मूंगफल्ली की खेती करेंगे। 

किसानों को दी जाएंगी यह सुविधाएं 

मूंगफल्ली की खेती करने के लिए प्रेरित करने हर ब्लॉक में एक एफपीओ को वैल्यू चैन पार्टनर बनाया गया है। किसानों को फ्री प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही एक किसान को एक हेक्टेयर के लिए 20 किलोग्राम बीज फ्री दिया जा रहा है। इसके अलावा और बीज लगने पर किसान को केवल 20.17 रुपये प्रति किलोग्राम लगेंगे। कदरी लिपाक्षी किस्म का बीज दिया जा रहा है जो कि केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराया गया है। 

मक्का का अब कम हो रहा रकबा 

मक्का के उचित दाम नहीं मिलने से जिले के किसानों का अब मक्का से भी मोहभंग होता जा रहा है। बीते साल जिले में 1632 हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन मक्का की खेती हुई थी। इसे देख कर इस साल जिले में इसका लक्ष्य 2400 हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन अभी तक मात्र 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है। अब इसमें और इजाफा होने की कोई उम्मीद भी नहीं है। पहले मक्का के रेट 20 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गए थे, लेकिन अब 13-14 रुपये पर मक्का के भाव आ गए हैं। इससे अब किसान मक्के की बुआई नहीं करना चाहते। 

अभी तक लक्ष्य से ज्यादा हो चुकी बुआई 

यदि इस रबी सीजन में कुल बुआई की स्थिति देखें तो जिले में लक्ष्य से ज्यादा बुआई हो चुकी है। बीते साल 350056 हेक्टेयर में बुआई हुई थी। इस साल 352000 हेक्टेर का लक्ष्य रखा था, लेकिन 23 जनवरी तक की स्थिति में 354210 हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है। यह लक्ष्य का 101 प्रतिशत है। इसमें और इजाफा होने की संभावना है क्योंकि फरवरी माह के आखरी तक जिले में बुआई चलती रहती है। 

गेहूं और चना का बढ़ गया रकबा 

जिले में इस बार गेहूं और चना का रकबा बढ़ा है। गेहूं की बुआई 260000 हेक्टेयर के मुकाबले 266100 हेक्टेयर में और चना की बुआई 44000 के मुकाबले 50200 हेक्टेयर में हुई है। इसी तरह मटर के रकबे में भी थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। मटर का लक्ष्य 2000 हेक्टेयर तय किया था, लेकिन 2100 हेक्टेयर में इसकी बुआई हुई है। वहीं मसूर, सरसो, गन्ना का रकबा लक्ष्य से फिलहाल कम है। 

इनका कहना...

जिले में इस साल मूंग की जगह मूंगफल्ली की खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों का चयन कर लिया गया है। उन्हें प्रशिक्षण देकर बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- डॉ. आनंद कुमार बडोनिया, उप संचालक (कृषि), बैतूल