► पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने के लिए होगा सम्मान 
► जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने हेतु 2019 में मिला था जल प्रहरी पुरस्कार 

Mohan Nagar Padma Shri: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नदी-तालाब की सफाई हो या फिर बोरी बंधान हो... इन स्थानों पर साफ-सफाई करते या खुद भारी भरकम बोरी या मिट्टी से भरे हुए तसले उठाते हुए वे हर जगह सहज ही नजर आ जाते हैं। जरुरी नहीं कि बड़े-बड़े लोग होने पर ही वे वहां पहुंचेंगे बल्कि यह कार्य कर रहे गरीब से गरीब और ग्रामवासियों के बीच भी कांधे से कांधा मिलाते बीते कई सालों से उन्हें पूरा जिला देख रहा है। जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष बनने के बाद राज्य मंत्री का दर्जा उन्हें भले ही मिल गया हो, लेकिन प्रकृति के प्रति उनका समर्पण और सादगी भरा उनका व्यक्तित्व पहले की तरह ही बना रहा। प्रकृति के प्रति उनके निश्छल प्रेम और निष्ठा ने ही उन्हें देश के सर्वोच्च पुरस्कारों में से एक पद्म श्री का हकदार बना दिया है। यही नहीं उनकी इस उपलब्धि ने समूचे बैतूल जिले और प्रदेश को भी गौरवान्वित किया है। 

हम बात कर रहे हैं अपने कार्यों से जल पुरूष और प्रकृति प्रेमी के रूप में विख्यात मोहन नागर की। गौरतलब है कि देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण में प्रदान किए जाते हैं। ये पुरस्कार कला, समाज सेवा, साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस, इंडस्ट्री, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल और सिविल सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए दिए जाते हैं। आज इन पुरस्कारों की घोषणा भारत सरकार द्वारा की गई है। पर्यावरणविद श्री नागर को पद्म श्री सम्मान 2026 प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान कुल 45 हस्तियों को दिया जाएगा, जिनमें से श्री नागर भी शामिल हंै। इन सम्मानों के लिए चयनित हस्तियों की जैसे ही घोषणा हुई, वैसे ही समूचा जिला स्वयं को गौरवान्वित महसूस करने लगा। 

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु स्वयं करेंगी सम्मान 

पद्म पुरस्कारों से सम्मानित सभी हस्तियों को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु स्वयं राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में सम्मानित करेंगी। पद्म श्री पुरस्कार के रूप में राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाण पत्र (सनद) और एक कांस्य (मैडल) दिया जाता है। यह देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इस सम्मान के लिए मध्यप्रदेश से श्री नागर के अलावा सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रायकवार और भोपाल निवासी वरिष्ठ पत्रकार कैलाशचंद्र को चयनित किया गया है। 

श्री नागर की पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा दीक्षा 

स्वर्गीय भंवरलाल नागर और स्वर्गीय गुलाबदेवी नागर के घर श्री नागर का जन्म 23 फरवरी 1968 को हुआ था। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन से राजनीति विज्ञान में एमए किया। वर्तमान में वे मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने भारत भारती शिक्षा संस्थान जामठी बैतूल में करीब 30 सालों तक सचिव के रूप में सेवाएं दी। इस संस्थान को राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने में उनकी मुख्य भूमिका रही। 

पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में विशेष योगदान

श्री नागर ने पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है। पर्यावरण और जल संरक्षण के कार्यों में उन्होंने सिर्फ जुबानी योगदान ही नहीं दिया बल्कि पिछले कई सालों से धरातल पर उतर कर कार्य कर रहे हैं। इन कार्यों के लिए कई किलोमीटर दूर स्थित दूरदराज के गांवों तक पहुंचने से भी उन्हें जरा भी गुरेज नहीं। कहीं से भी उन्हें पर्यावरण संरक्षण या नदी-तालाब स्वच्छता संबंधी कार्यों की सूचना भर मिली कि वे स्वयं मौके पर पहुंच कर ग्रामवासियों और छोटे से छोटे कार्यकर्ता साथ हाथ बंटाते नजर आ जाते हैं। सहजता से उन्हें सभी के बीच कार्य करते देख कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि वे राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त हैं। इसके अलावा वे नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा यूनिवर्सिटी जबलपुर प्रबंधन मंडल के सदस्य और मध्यप्रदेश शासन वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य भी हैं। 

खुद चलाते गैंची और फावड़े, उठाते हैं तसला 

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े किसी भी कार्य से उन्हें परहेज नहीं। तालाब में कीचड़ में उतर कर गंदगी साफ करना हो, बोरी बंधान के लिए भारी भरकम बोरी उठाना हो, पौधे रोपने के लिए गड्ढे खोदने के लिए गैंची उठाना हो या फिर तालाब खुदाई के दौरान मिट्टी भरकर तसला उठाना हो, वे ऐसे किसी कार्य से कभी बचने का प्रयास तक नहीं करते। कतिपय नेताओं की तरह केवल फोटो खिंचवाने के लिए उन्होंने कभी पर्यावरण सेवा का दिखावा नहीं किया। यही कारण है कि उनकी सेवा की गवाही उनके कई कार्य दे रहे हैं। 

आज हरियाली से लहलहा रही सोनाघाटी की पहाड़ी 

बैतूल शहर से सटी सोनाघाटी की पहाड़ी एक समय पूरी तरह से उजाड़ हो चुकी थी। इस पहाड़ पर पेड़-पौधे बिल्कुल नजर नहीं आते थे। इसका असर पर्यावरण और भूजल स्तर पर भी पड़ रहा था। श्री नागर की अगुवाई में इस पहाड़ी पर गंगावतरण अभियान चलाया गया। उनके आह्वान पर हजारों स्वयंसेवक भी इस अभियान से जुड़े और कई सालों तक इस पहाड़ी पर लगातार हजारों की संख्या में पौधे रोपे गए। न केवल पौधे लगाए गए, बल्कि उन्हें पाला पोसा भी गया। इन्हीं सब का नतीजा है कि आज सोनाघाटी की यह पहाड़ी आज हरियाली से लहलहा रही है। इतना ही नहीं क्षेत्र के भूजल स्तर में भी खासी बढ़ोतरी हुई है। 

हजारों बोरी बंधान किए, तालाबों का किया कायाकल्प 

श्री नागर के नेतृत्व में जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। श्री नागर के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने बगैर किसी सरकारी सहायता के हजारों की संख्या में बोरी बंधान किए, जिन्होंने भूजल स्तर बढ़ाकर जल संकट दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही नहीं कई तालाबों का भी श्रमदान से कायाकल्प किया। कई ऐसे तालाब हैं जो कि पहले गर्मी शुरू होते ही सूख जाते थे, लेकिन अब उनमें साल भर पानी भरा रहता है। 

प्राकृतिक खेती की दिशा में उल्लेखनीय कार्य 

श्री नागर रासायनिक खेती के खतरों को देखते हुए प्राकृतिक खेती की ओर अधिक से अधिक किसानों को प्रेरित करने की दिशा में भी कई सालों से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने स्वयं इसके लिए भारत भारती परिसर में प्राकृतिक खेती शुरू कर उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि प्रदेश भर के और अन्य राज्यों से भी किसान साल भर प्राकृतिक खेती के लाभ जानने और प्राकृतिक खेती के तरीके सीखने के लिए भारत भारती का भ्रमण करते हैं। 

सोशल मीडिया के जरिए भी कर रहे जागरूक 

श्री नागर एक ओर जहां जमीनी कार्य करने में विश्वास करते हैं वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया का सही उपयोग कैसे किया जाता है, इसके भी रोल मॉडल माने जा सकते हैं। वे सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय रहते हैं। इसके जरिए वे विभिन्न विषयों पर लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। 

बेहद गर्व महसूस कर रहा हूं: मोहन नागर 

इस बेहद उपलब्धि पर प्रतिक्रिया जानने 'राष्ट्रीय जनादेश' द्वारा संपर्क किए जाने पर श्री नागर ने कहा कि इस देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म श्री के लिए चुने जाने पर मैं बेहद गर्व महसूस कर रहा हूं। आज पूरे जिले के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने आगे कहा कि इसका श्रेय जनजातीय समाज और गंगावतरण अभियान में सहयोग देने वाले हजारों स्वयंसेवकों को है, जिनकी अथक मेहनत से मुझे यह पुरस्कार मिल रहा है। 

श्री नागर को पूर्व में मिले पुरस्कार व सम्मान 

  • नदी व जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने हेतु 2019 राष्ट्रीय  'जल प्रहरी' सम्मान से दिल्ली में सम्मानित। 
  • जल संरक्षण के ही क्षेत्र में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 2020 में  'वाटर हीरो' सम्मान से सम्मानित।
  • मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गौ सेवा हेतु दिए जाने वाले 'गोपाल पुरस्कार' से सम्मानित।
  • मध्यप्रदेश शासन की साहित्य अकादमी द्वारा स्वयं की काव्य कृति  'चातुर्मास' को दुष्यंत कुमार साहित्य अकादमी पुरस्कार से राज्यपाल द्वारा सम्मानित।
  • भूगर्भ जल संरक्षण हेतु भाऊराव देवरस राष्ट्रीय पुरस्कार से दिल्ली में सम्मानित।