Betul Municipal Council Controversy: नगर पालिका सम्मेलन में हंगामा: सीएमओ की रणनीति में फंसे जतिन पाल, स्ट्रीट लाइट बना विवाद का केंद्र
बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। भारी जद्दोजहद और खींचतान के चलते 5 माह बाद बुलाया गया नगर पालिका परिषद बैतूल का सम्मेलन सीएमओ सतीष मटसेनिया की राजनीति का शिकार हो गया और दो घंटे के हंगामे के बाद पूर्व निर्धारित प्लानिंग के तहत सम्मेलन को स्थगित कर दिया गया। नगर पालिका के सूत्र बताते हैं कि चूंकि सत्तापक्ष और विपक्ष के कुछेक पार्षद जेल जमीन आवंटन और एमराल्ड के मुद्दे पर नगर पालिका के अधिकारियों को घेरना चाहते थे इसलिए सीएमओ ने सुनियोजित तरीके से स्ट्रीट लाइट और एजेंडे के मुद्दे को विवाद का केंद्र बना दिया।
चर्चा है कि सम्मेलन के पूर्व ही सीएमओ मटसेनिया ने स्ट्रीट लाइट संबंधी कार्यों को देखने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को सम्मेलन में किसी भी कीमत पर चुप्पी बनाए रखने के आदेश दे दिए थे। इतना ही नहीं जिस सबइंजीनियर जतिन पाल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया उस सबइंजीनियर को सीएमओ मटसेनिया पिछले कुछ महीनों से जमकर प्रताडि़त कर रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण जतिन पाल का अपने आप को ट्रैचिंग ग्राऊंड मामले से अलग करना बताया जा रहा है।
उपयंत्री के खिलाफ लाया निंदा प्रस्ताव
नगर पालिका परिषद बैतूल में वैसे तो सीएमओ मटसेनिया 12 जनवरी को लंबी छुट्टी के बाद वापस लौटे हैं लेकिन पार्षदों के दबाव और अखबारबाजी के चलते 5 महीने बाद उन्होंने नगर पालिका का सम्मेलन बुलाया था जिसमें नगर के विकास से जुड़े मुद्दों सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और निर्णय होने थे। लेकिन 2 घंटे हंगामा चलने के बाद सम्मेलन स्थगित कर दिया गया। सम्मेलन में एजेंडा तय करने में राय नहीं लेने और वार्डों में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट के मुद्दे को लेकर खूब हंगामा हुआ। बाद में सबइंजीनियर जतिन पाल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया।
सीएमओ की गुड बुक में थे जतिन पाल
नगर पालिका के सूत्र बताते हैं कि बुधवार को नगर पालिका के सम्मेलन में जो कुछ हुआ उसकी पटकथा सीएमओ मटसेनिया ने पहले ही लिख दी थी। चर्चा के मुताबिक ट्रैचिंग ग्राऊंड के मामले से अपने आपको अलग करने और जनप्रतिनिधियों से मिलकर उन्हें नगर पालिका और सीएमओ सतीष मटसेनिया की सारी वास्तविकता से अवगत कराने के चलते जतिन पाल को प्रताडि़त करने का दौर पिछले 2-3 महीने से लगातार जारी है। जांच का विषय यह भी है कि पिछले 3 महीने में जतिन पाल का प्रभार या उनके कार्य कितने बार बदले गए यह भी देखा जाना चाहिए।
स्थगित कर दिया सम्मेलन
5 माह बाद हो रहे नगर पालिका के सम्मेलन के एजेंडे को तय करने में पार्षदों की राय नहीं लेने के चलते पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। वहीं बहुचर्चित एमराल्ड हाईट्स और जेल की जमीन के मुद्दे को लेकर नगर पालिका बैतूल ने जो परमिशन जारी की हैं उसका मामला भी सम्मेलन में सत्तापक्ष और विपक्ष के पार्षद उठाने वाले थे। सीएमओ मटसेनिया किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहते थे कि इन दोनों मुद्दों को सम्मेलन में उठाया जाए। वहीं वार्डों में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट का एक मुद्दा भी था। सम्मेलन में स्ट्रीट लाइट के मुद्दे को इतना खींचा गया कि आखिर में सम्मेलन स्थगित ही हो गया।
विधायक को बताई थी सीएमओ की वर्किंग
सम्मेलन में जिस सबइंजीनियर जतिन पाल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया उससे सीएमओ सतीष मटसेनिया कुछ समय से खासे नाराज चल रहे हैं। जब तक जतिन पाल सीएमओ के यसमैन बने रहे तब तक सीएमओ खुश थे। जैसे ही सीएमओ का कच्चा चिट्ठा बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल के सामने खुला सीएमओ की वर्किंग बदल गई। वैसे भी जब से इनकी बैतूल पोस्टिंग हुई है यह नगर पालिका में यदा-कदा ही दिखाई पड़ते हैं। शहर की जो बैंड बजी हुई है वह किसी से छिपी नहीं है।
बैतूल से रवानगी की तैयारी में मटसेनिया
नगर पालिका कैम्पस और पार्षदों के बीच चल रही चर्चाओं के मुताबिक सीएमओ मटसेनिया मार्च में सबकुछ समेट कर बैतूल से रवानगी की तैयारी में हैं। बैतूल से रवानगी के लिए उन्होंने अपने स्तर पर फिल्डिंग भी सैट कर ली है। मटसेनिया को वैसे भी अब यह समझ आ गया है कि बैतूल विधायक की नाराजगी उनके प्रति बढ़ती जा रही है। इसलिए वित्तीय वर्ष समाप्त कर 31 मार्च के बाद कभी भी मटसेनिया बैतूल से अन्यंत्र प्रस्थान कर सकते हैं।

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