Betul ISBT Project: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बैतूल शहर को मिलने वाली दो बड़ी सुविधाएं फिलहाल खटाई में पड़ गई हैं। इनमें से एक है इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) और दूसरी है सर्व सुविधायुक्त फायर स्टेशन। इन प्रोजेक्टों के खटाई में पड़ने की वजह यह है कि इनके लिए जो जमीन प्रस्तावित की गई थी, वह जमीन नगर पालिका को नहीं मिलेगी। कमिश्रर कोर्ट नर्मदापुरम ने इस मामले में अपील दायर करने वालों के पक्ष में फैसला सुनाया है। 

जिला मुख्यालय के कोठीबाजार स्थित मुख्य बस स्टैंड पर जिले में चलने वाली बसें भी आती हैं और जिले के बाहर और अन्य राज्यों के लिए चलने वाली लंबी दूरी की बसें भी आती हैं। सालों पहले बने इस बस स्टैंड पर अब जगह कम पड़ने लगी हैं। चूंकि बैतूल सीमावर्ती जिला है, इसलिए यहां महाराष्ट्र समेत अन्य कुछ राज्यों के लिए भी बड़ी संख्या में आती और यहां से जाती है। यही कारण है कि यहां पर महानगरों की तरह आईएसबीटी बनाए जाने की योजना है। इसी तरह एक सर्व सुविधायुक्त फायर स्टेशन की भी बेहद जरुरत है, जहां दमकलों को व्यवस्थित रूप से खड़ी रखा जा सके और शहर और जिले के अन्य स्थानों के लिए भी दमकलें आसानी से रवाना की जा सके। 

फायर स्टेशन के लिए राशि भी आ चुकी 

फायर स्टेशन का निर्माण मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (एमपीयूडीसी) भोपाल द्वारा किया जाना है। बताया जाता है कि इसके लिए 2 करोड़ रुपए की राशि भी मिल चुकी है। इसके अलावा टेंडर भी हो चुके हैं। यदि जमीन उपलब्ध हो जाती तो तत्काल इसका कार्य भी शुरू किया जा सकता था। 

दोनों प्रोजेक्टों के लिए चाहिए इतनी जमीन

आईएसबीटी और फायर स्टेशन के लिए कुल 11 एकड़ जमीन की दरकार है। इसमें से 9 एकड़ आईएसबीटी के लिए और 2 एकड़ जमीन फायर स्टेशन के लिए चाहिए। आईएसबीटी बनने से शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होता और यात्रियों को यात्रा करने में बड़ी आसानी हो जाती। नए बस स्टैंड पर कई सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती थी। 

करबला पर जमीन देने की थी तैयारी 

इन दोनों प्रोजेक्टों के लिए प्रशासन ने बैतूल-इंदौर हाईवे पर करबला पर स्थित 11 एकड़ जमीन को उपयुक्त मानते हुए इसके लिए प्रक्रिया शुरू की थी। यह जमीन नगर पालिका को हैंडओवर हो पाती और काम शुरू हो पाता, इसके पहले ही जमीन का मामला विवादों के घेरे में आ गया। इस जमीन को लेकर मंदिर से जुड़े लोगों ने कमिश्रर कोर्ट नर्मदापुरम में अपील दायर कर दी। 

अपीलकर्ताओं द्वारा यह दिया गया तर्क 

इस मामले में अपील करने वालों का कहना था कि जिस जमीन को प्रशासन आईएसबीटी के लिए आवंटित कर रहा है, वह उनके लंबे समय से कब्जे में है और बिना सहमति इसे बस स्टैंड निर्माण के लिए लिया जा रहा है। दूसरी ओर प्रशासन का तर्क था कि यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में मंदिर के नाम दर्ज थी। जमीन को मंदिर निर्माण और संचालन के लिए आवंटित किया गया था। मंदिर से जुड़े लोग ही वर्षों से इसका उपयोग कर रहे थे, लेकिन सर्वाकार (कानूनी स्वामित्व) से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध न होने से कलेक्टर द्वारा यह आवंटन समाप्त कर जमीन को शासन के अधीन कर लिया गया। 

अब नहीं मिलेगी नपा को यह जमीन 

कमिश्रर कोर्ट में चले इस प्रकरण में मंदिर से जुड़े लोगों के पक्ष में फैसला आया है। नगर पालिका सीएमओ सतीश मटसेनिया ने इसकी पुष्टि की है। कमिश्रर कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आने से अब यह जमीन नगर पालिका को नहीं मिलेगी और न ही यहां पर आईएसबीटी या फायर स्टेशन का निर्माण हो सकेगा। अब इसके लिए नई जमीन की तलाश करना होगा। इससे इन प्रोजेक्टों को अमलीजामा पहनाने में और देरी होगी।