Police Investigation Failure: लचर विवेचना ने खोली पुलिस की पोल, सरे मामलों में चोर-डकैत हो गए बाइज्जत बरी
Police Investigation Failure: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। पुलिस महकमे में जितना जरुरी किसी अपराधी को पकड़ना होता है, उतना ही महत्वपूर्ण सही तरीके से विवेचना कर उसे सजा दिलाना भी होता है, लेकिन बैतूल पुलिस इस पैमाने पर जरा भी खरी उतरती नजर नहीं आ रही है। यह खरी सच्चाई उस समय सामने आई जब पुलिस कप्तान ने चोरी, नकबजनी, डकैती, लूट एवं गृहभेदन जैसे अपराधों की न्यायालयीन स्थिति की समीक्षा की। इस समीक्षा में जो हकीकत सामने आई, उसे देख कर कप्तान भी हैरत में पड़ गए। बदहाल और लचर विवेचना की स्थिति देख कर उन्होंने विवेचकों पर कठोर कार्रवाई किए जाने का फरमान सुनाया है।
गौरतलब है कि हाल ही में चर्चित साइबर ठगी केस में कोतवाली पुलिस की लापरवाही से एक आरोपी जमानत पाने में कामयाब हो गया था। पुलिस महकमा यह दर्द चाह कर भी नहीं भूल पा रहा है। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन की सख्ती के बाद पुलिस इस मामले की पड़ताल बड़ी गहराई से कर रही है और आलम यह है कि अभी तक भी इसमें आरोपियों की गिरफ्तारी का दौर जारी है। इस बीच आरोपी की जमानत हो जाने को बेहद गंभीरता से लेते हुए एसपी श्री जैन अन्य मामलों की पड़ताल में भी जुट गए हैं। इसी तारतम्य में उन्होंने चोरी, नकबजनी, डकैती, लूट एवं गृहभेदन के प्रकरणों की न्यायालयीन स्थिति की समीक्षा की। यहां विवेचकों की गंभीर लापरवाही सामने आने पर इन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संभवत: यह पहला मौका होगा जब लचर विवेचना के लिए विवेचकों पर कार्रवाई हो रही है।
समीक्षा में सामने आए चिंताजनक और अस्वीकार्य तथ्य
एसपी श्री जैन द्वारा वर्ष 2025 के दौरान जिले में दर्ज चोरी, नकबजनी, डकैती, लूट एवं गृहभेदन जैसे गंभीर संपत्ति संबंधी अपराधों की न्यायालयीन स्थिति की समीक्षा की गई। इसमें अत्यंत गंभीर, चिंताजनक एवं अस्वीकार्य तथ्य सामने आए।
चालीस में से एक भी प्रकरण में सजा नहीं
समीक्षा में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि वर्ष 2025 में डकैती, चोरी एवं लूट के कुल 40 प्रकरणों में से एक भी प्रकरण ऐसा नहीं है जिसमें आरोपी को सजा दिलाई जा सकी हो। सभी 40 प्रकरणों में आरोपियों को न्यायालय से 100 प्रतिशत दोष मुक्ति प्राप्त हुई है। इसी प्रकार गृहभेदन के 43 प्रकरणों में से मात्र 1 प्रकरण में ही सजा हो सकी, जबकि शेष 42 प्रकरणों में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। दोष मुक्ति प्रतिशत लगभग 96 प्रतिशत रहा, जो कि पुलिस विवेचना की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
एसपी जैन बोले- यह अकर्मण्यता का है परिणाम
पुलिस अधीक्षक द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि उपरोक्त स्थिति सामान्य त्रुटि नहीं बल्कि विवेचना में गंभीर लापरवाही, अकर्मण्यता एवं पेशेवर उदासीनता का परिणाम है। विवेचना के दौरान साक्ष्यों के संकलन, तकनीकी प्रमाणों की प्रस्तुति, गवाहों के कथनों एवं कानूनी प्रक्रियाओं के पालन में की गई चूक सीधे तौर पर अपराधियों को लाभ पहुंचा रही है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
अर्थदंड सहित कठोर विभागीय कार्रवाई होगी
उक्त प्रकरणों में जिन विवेचकों की लापरवाही परिलक्षित हुई है, उनके विरुद्ध अर्थदंड सहित कठोर विभागीय कार्रवाई किए जाने के निर्देश पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी कर दिए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि भविष्य में विवेचना के स्तर पर की गई प्रत्येक लापरवाही को सेवा दोष मानते हुए सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक ने दी अंतिम चेतावनी
पुलिस अधीक्षक श्री जैन ने जिले के सभी थाना प्रभारियों एवं विवेचकों को अंतिम चेतावनी देते हुए निर्देशित किया है कि वे विवेचना को केवल औपचारिकता न मानें। अपराधियों की मात्र गिरफ्तारी से पुलिस की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती, बल्कि न्यायालय से दोषसिद्धि सुनिश्चित करना पुलिस का मूल दायित्व है। यह स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि आगामी अवधि में यदि चोरी, नकबजनी, डकैती, लूट एवं गृहभेदन जैसे अपराधों में विवेचना की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई, तो संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के विरुद्ध कठोरतम विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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