Collectorate Staff Shortage: रिटायरमेंट की मार: बैतूल कलेक्ट्रेट में और गहराएगा कर्मचारियों का संकट
अमले की भारी कमी से जूझ रहा जिले का प्रशासनिक केंद्र, एक के पास दो से तीन प्रभार
Collectorate Staff Shortage: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। यूं तो जिले के हर सरकारी विभाग में ही कर्मचारियों की भारी किल्लत चल ही है, लेकिन जिले का प्रशासनिक केंद्र कहा जाने वाला कलेक्ट्रेट भी इससे अछूता नहीं है। यहां स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में पदस्थ कर्मचारियों की स्थिति देखें तो सहज ही बदहाली का अंदाजा लग जाता है। अब इस पर भी दुबले पर दो आषाढ़ वाली स्थिति यह बनने वाली है कि इनमें से भी दर्जन भर कर्मचारी इस साल सेवानिवृत्त हो जाएंगे। जिससे यहां बाबुओं से लेकर भृत्य तक की और ज्यादा कमी हो जाएगी।
बैतूल जिला वैसे तो अब हाई प्रोफाइल जिला बन चुका है। केंद्र सरकार में एक मंत्री और सत्ताधारी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तक बैतूल जिले से हैं। उम्मीद की जा रही थी कि हाई प्रोफाइल कैटेगिरी में आने के बाद जिले में हर क्षेत्र में तेजी से सुधार होगा। प्रशासन में जहां काबिल और बेहतर अधिकारी जिले में पदस्थ किए जाएंगे वहीं अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी भी दूर हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिले के कई अधिकारियों की काबिलियत और कार्यशैली पर लंबे समय से सवालिया निशान लगते रहे हैं वहीं दूसरी ओर अधिकांश विभाग कर्मचारियों की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं।
कलेक्ट्रेट तक में पर्याप्त कर्मचारी नहीं
बदहाली का आलम यह है कि कलेक्ट्रेट तक में पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। यहां जो पद स्वीकृत हैं, वे काफी पहले की जरुरत और उस समय के वर्कलोड के अनुसार थे। इसके विपरीत अब वर्कलोड कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में कर्मचारियों की भी ज्यादा जरुरत है, लेकिन यहां हालात यह है कि सालों पहले जितने पद स्वीकृत थे, आज उतने भी पदस्थ नहीं हैं।
अभी कर्मचारियों की यह है स्थिति
अभी कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों की स्थिति देखें तो वे काफी कम हैं। यहां सहायक ग्रेड-2 के 42 पद स्वीकृत हैं, इनमें से मात्र 12 पदस्थ हैं और 30 पद खाली हैं। इसी तरह सहायक ग्रेड-3 के 101 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 87 पदस्थ हैं और 14 पद खाली हैं। भृत्य के 137 पद खाली हैं, लेकिन 97 पदस्थ हैं और 40 पद खाली हैं। कलेक्ट्रेट अधीक्षक का पद भी खाली है। वहीं सहायक अधीक्षक के 2 पद स्वीकृत हैं पर 1 ही (एमडी मालवीय) पदस्थ है। उनके पास भी फिलहाल अधीक्षक का प्रभार है और जल्द ही रिटायर होने वाले हैं। स्टेनोग्राफर का पद भी वर्तमान में खाली है। इस पर जिला पंचायत में पदस्थ स्टेनोग्राफर मुकेश गुमास्ता से काम लिया जा रहा है।
दर्जन भर कर्मचारी हो जाएंगे रिटायर
कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों की कमी जल्द ही और बढ़ने वाली है। इस साल कलेक्ट्रेट के एक दर्जन कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इनमें 3 सहायक ग्रेड-2 और 4 भृत्य शामिल हैं, जिनकी पहले से ही यहां काफी कमी चल रही है। इनके अलावा सहायक अधीक्षक और 4 सहायक ग्रेड-3 भी रिटायर हो जाएंगे। इससे कलेक्ट्रेट के कामकाज में और भी परेशानी होना तय है।
कौन, कब हो रहे हैं सेवानिवृत्त
सहायक ग्रेड-3 डीआर पवार 30 अप्रैल को, सहायक ग्रेड-2 एसके मगरकर और सहायक ग्रेड-3 हेमराज झाड़े 31 मई को, सहायक अधीक्षक एमडी मालवीय, सहायक ग्रेड-2 मीना अहाके, मोहम्मद युनूस खान और सहायक ग्रेड-3 रवींद्र कुमार तिवारी 30 जून को, सहायक ग्रेड-3 श्यामराव म्हास्की 30 नवंबर को, भृत्य शिशुपाल भोपते 30 जून को, प्रयाग पोटफोड़े 31 जुलाई को, शंभू कवड़े 30 सितंबर को और ललिता पंडाग्रे 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद अगले साल भी लगभग इतने ही कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे।
फिलहाल ऐसे चल रहा है काम
कर्मचारियों की भारी कमी के बीच यहां जैसे-तैसे काम चलाना पड़ रहा है। सहायक ग्रेड-2 पर वर्कलोड काफी ज्यादा है। एक-एक कर्मचारी के पास 2 से 3 प्रभार है। यही वजह है कि शाम 5 बजे तक की जगह कुछ कर्मचारी 8-9 बजे तक भी काम निपटाते नजर आते हैं।
इन कारणों से बना है स्टाफ का टोटा
कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों की कमी की एक प्रमुख वजह यह बताई जा रही है कि सालों से प्रमोशन नहीं हुआ है। इससे पहले 10 साल पहले 2016 में पदोन्नति हुई थी। यदि पदोन्नति हो जाती तो वर्ग-2 के इतने पद खाली नहीं रहते। यदि लगातार पदोन्नति होती तो अधिकांश भृत्य भी पदोन्नत होकर सहायक ग्रेड-3 बन चुके होते। अभी जो सहायक ग्रेड-3 हैं, उनमें भी अधिकांश भृत्य से पदोन्नत हुए वाले हैं। इनके अलावा नए कर्मचारी भी पदस्थ नहीं हो रहे हैं। इन्हीं सब कारणों से स्टाफ कम है।
यहां पर्याप्त स्टाफ होना बेहद जरुरी
जिले का प्रशासनिक केंद्र होने से कलेक्ट्रेट सबसे महत्वपूर्ण कार्यालय है। यही कारण है कि यहां पर पर्याप्त कर्मचारियों का होना बेहद जरुरी है। आबादी और योजनाएं बढ़ने से काम भी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कर्मचारी बढ़ने के बजाय कम होते जा रहे हैं। यही कारण है कि मौजूदा कर्मचारियों पर कार्य का बोझ काफी बढ़ गया है। कई कर्मचारी तो इससे परेशान होकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का मन भी बना रहे हैं।

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