Betul Bureaucracy Public Interest Issues: फाइलें दौड़ीं कंपनी के लिए, जनता के लिए थमी रफ्तार: बैतूल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
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जनहित से ज्यादा व्यवसायिक हित के मुद्दों की चिंता कर रही ब्यूरोक्रेसी
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काश! जनहित के मुद्दों पर बनी कमेटियां भी दे देती त्वरित निर्णय
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ट्रैचिंग ग्राऊंड, जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट का आज तक पता नहीं
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एमराल्ड हाईट्स के मामले में 10 दिन में जांच कमेटी ने दी क्लीन चिट
Betul Bureaucracy Public Interest Issues: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। राजनैतिक नजरिए से हाईप्रोफाइल जिले की श्रेणी में पहुंचे बैतूल में अभी भी ब्यूरोक्रेसी आऊट ऑफ कंट्रोल (जनप्रतिनिधियों से) की स्थिति में है। जिले की अफसरशाही को जनहित से जुड़े मुद्दों से ज्यादा व्यवसायिक हित से जुड़े मामलों की चिंता रहती है। बीते 2-3 महीनों में सामने आए कुछ प्रमुख घटनाक्रमों से तो यही संदेश जाता है। ताजातरीन मामले में लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे एमराल्ड हाईट्स को क्लीन चिट देने का मामला सामने आया है जिसमें 10 दिनों के अंदर जांच कमेटी ने जांच पूरी कर कंपनी को क्लीन चिट तो दी ही बकायदा इसके लिए जिला जनसंपर्क कार्यालय के माध्यम से प्रेस नोट भी जारी किया गया है। यहां बड़ा सवाल यह है कि जनहित और जनसमस्याओं से जुड़े दो गंभीर मुद्दों के लिए बनाई गई जांच समितियों की रिपोर्ट का आज तक पता ठिकाना नहीं है जिसमें ट्रैचिंग ग्राऊंड और जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही से हुई मौतों के मामले शामिल हैं। इन दोनों जनहित हितैषी मुद्दों को लेकर उम्मीद है कि हमारे प्रभावशाली जनप्रतिनिधि जिला प्रशासन के अफसरों से सवाल-जवाब करेंगे।
जनहितैषी मुद्दों पर भी दिखाएं ऐसी फूर्ति
बैतूल जिले में ब्यूरोक्रेसी मनमर्जी की मालिक नजर आती है। जिले के जनप्रतिनिधियों का अफसरों पर कंट्रोल दिखाई ही नहीं देता है। जबकि अब राजनैतिक तौर पर जिला हाईप्रोफाइल हो गया है क्योंकि सांसद डीडी उइके अब केंद्रीय राज्यमंत्री हैं और विधायक हेमंत खण्डेलवाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं। बावजूद इसके अफसरों की जनहितैषी मुद्दों पर जो कार्यप्रणाली होनी चाहिए वह किसी भी नजरिए से दिखाई नहीं दे रही है।
दल भी बन गया और रिपोर्ट भी आ गई
लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे जेल प्रोजेक्ट के मामले में कलेक्टर ने 31 दिसम्बर को एमराल्ड हाईट्स के मामले में बैतूल एसडीएम को जांच कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे। एसडीएम बैतूल ने कलेक्टर के निर्देश पर 2 जनवरी को 9 सदस्यीय जांच दल भी बना दिया था। इस जांच दल ने त्वरित जांच करते हुए 12 जनवरी 2026 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए जेल प्रोजेक्ट के मामले में सारी शिकायतों को खारिज करते हुए कंपनी को क्लीन चिट दे दी। व्यवसायिक हित से जुड़े इस मुद्दे पर जांच कमेटी ने गजब की स्पीड दिखाई है। इतना ही नहीं कंपनी को क्लीन चिट देने के मामले में बकायदा सरकारी प्रेस नोट भी जारी कर प्रचार-प्रसार किया गया।
इन मुद्दों पर क्यों नहीं पड़ रही कमेटी की नजर
यहां दिक्कत इस बात से नहीं है कि जेल प्रोजेक्ट में क्लीन चिट दे दी गई। दर्द इस बात का है कि जिला अस्पताल में पिछले तीन-चार महीनों में इलाज में लापरवाही का आरोप, आपरेशन के लिए पैसे मांगने का आरोप लगने पर प्रशासन द्वारा जो जांच कमेटियां बनाई गईं उनका नतीजा आज तक ना तो सामने आया है और ना ही किसी दोषी पर कोई कार्यवाही की गई है। हद तो तब हो जाती है जब 14 नवम्बर 2025 की रात में जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही से एक महिला की मौत हो जाती है और 15 नवम्बर को इस मामले में जमकर हंगामा होने के बाद जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल स्वयं जिला अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिजनों सहित अन्य को यह सार्वजनिक आश्वासन देते हैं कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और हम राज्य स्तर से भी अधिकारी नियुक्त कर इसकी जांच कराएंगे। लेकिन इस मामले में भी लगभग दो माह बीतने के बाद नतीजा सिफर है।
कई बार लग चुके आरोप
इसके पहले भी जिला अस्पताल में सीजेरियन आपरेशन के नाम पर डॉक्टरों द्वारा पैसे लेने के गंभीर आरोप कई बार लगे हैं और इन मामलों की जांच के लिए जांच कमेटियां बनी हैं लेकिन किसी भी जांच कमेटी ने क्या निष्कर्ष निकाला इसको लेकर आज तक सरकारी प्रेस नोट या अन्य प्रचार माध्यमों के माध्यम से कभी कुछ सामने नहीं आया है।
इस मुद्दे की अब तक नहीं आई जांच रिपोर्ट
जनहित और जनसमस्याओं से जुड़ा एक और बड़ा मामला है जो यह भी साबित करता है कि जिले की ब्यूरोक्रेसी, जिले के जनप्रतिनिधियों को कितनी तवज्जो देती है। ट्रैचिंग ग्राऊंड में कचरा निष्पादन को लेकर लंबे समय से क्षेत्र के लोग शिकायत करते आए हैं। विगत 3 नवम्बर को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले के जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक कलेक्टर ने रखी थी। बैठक में नगरीय निकायों के स्वीकृत कार्यों के प्रगति की समीक्षा की गई थी और लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
अब तक क्या किया 7 सदस्यीय दल ने?
इस महत्वपूर्ण बैठक में बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने बैतूल नगर पालिका अंतर्गत ट्रैचिंग ग्राऊंड में कचरा निष्पादन की स्थिति और टैंडर में निर्धारित शर्तों के आधार पर काम नहीं होने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। जिस पर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने सीईओ जिला पंचायत अक्षत जैन को अपर कलेक्टर, एसडीएम बैतूल एवं ईई पीडब्ल्यूडी को शामिल करते हुए जांच दल गठित करने के निर्देश दिए गए थे। इस जांच दल को 7 दिन के अंदर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करना था। लेकिन ट्रैचिंग ग्राऊंड जैसी बड़ी जनसमस्या के मामले में आज तक इस प्रतिवेदन का अता-पता ही नहीं है।
इन दो मामलों से यह नतीजा आसानी से निकाला जा सकता है कि ब्यूरोके्रसी को जनहित-जनसमस्याओं से ज्यादा व्यवसायिक हितों से जुड़े मुद्दों की चिंता रहती है। यदि जनहित से जुड़े मुद्दों के लिए बनी जांच कमेटियां भी जेल प्रोजेक्ट के लिए बनी जांच कमेटी की गति से कुछ नतीजे दे देती तो आदिवासी जिले की जनता का भी कुछ भला हो जाता।

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