AMRUT Project Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नगर पालिका में जनता द्वारा चुने गए नुमाइंदे और शासन द्वारा तैनात अधिकारी कितनी मुस्तैदी से काम काज कर और करवा रहे हैं, इसका अंदाजा अमृत प्रोजेक्ट के तहत शहर में चल रहे टंकी निर्माण कार्य को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट में कुल 4 टंकियां बनना हैं, लेकिन 4 महीने पहले ही समय सीमा समाप्त होने के बावजूद अभी तक एक भी टंकी कंपलीट नहीं हो पाई है। यही नहीं एक टंकी का तो अभी तक काम भी शुरू नहीं हो पाया है। 

शहर में जल प्रदाय के लिए क्षमता बढ़ाने के लिए अमृत प्रोजेक्ट के तहत 4 अतिरिक्त टंकियां बनाई जाना है। इन टंकियों का निर्माण 11 करोड़ रुपये की लागत से होना है। इस कार्य का जिम्मा गुजरात की आनंद इंजीनियरिंग नामक कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी को यह कार्य 14 सितंबर 2025 तक पूरा करना था। यह बात अलग है कि इस अवधि तक आधा काम भी नहीं हो सका। लिहाजा, कंपनी को काम पूरा करने के लिए एक साल का एक्सटेंशन दिया गया है। अब कंपनी को यह कार्य 14 सितंबर 2026 तक पूरा करना है। हालांकि जो हालात हैं, उन्हें देखकर लगता नहीं कि इस अवधि में भी काम पूरा हो सकेगा। 

कहां-कहां बनाई जाना है टंकियां 

प्रोजेक्ट के तहत एक टंकी शहर के टिकारी क्षेत्र में बनना है। यह टंकी शहर की सबसे बड़ी है, जिसकी क्षमता 18.50 लाख लीटर है। दूसरी टंकी दुर्गा वार्ड में बनना है, जिसकी क्षमता 7.50 लाख लीटर है। तीसरी टंकी राजेंद्र वार्ड में बनना है, जिसकी क्षमता 12 लाख लीटर है। चौथी टंकी जयप्रकाश वार्ड में बनना है, जिसकी क्षमता 7.50 लाख लीटर है। 

किस टंकी की अभी क्या है स्थिति 

टिकारी और दुर्गा वार्ड में टंकी का निर्माण काफी पहले शुरू हो चुका है। हालांकि अभी इनका काम पूरा नहीं हो पाया है। लोगों का आरोप है कि काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। वहीं लोग गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। राजेंद्र वार्ड में बनने वाली तीसरी टंकी का निर्माण कार्य हाल ही में शुरू हुआ है। 

एक टंकी के लिए जगह ही फाइनल नहीं 

एक ओर जहां ठेका कंपनी पर धीमी रफ्तार से काम के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका के अफसरों के काम करने का रवैया भी बेहद सुस्त है। उनकी कार्यशैली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रोजेक्ट की टाइम लिमिट खत्म होने के बाद 4 महीने भी बीत चुके हैं, इसके बावजूद जयप्रकाश वार्ड में बनने वाली टंकी का स्थान ही फाइनल नहीं हो पाया है। अब बताया जा रहा है कि टंकी के लिए जगह मंत्रालय से ही होगी और इसके लिए फाइल भिजवा दी गई है। 

क्षमता बढ़ाने बन रही अतिरिक्त टंकियां

बताया जाता है कि नगर पालिका की प्लानिंग नागरिकों को 24 घंटे पानी उपलब्ध करने की है। इसके लिए वाटर सप्लाई नेटवर्क की क्षमता में बढ़ोतरी किया जाना जरुरी है। वर्तमान में जो क्षमता है, उससे 24 घंटे पानी सप्लाई करना संभव ही नहीं है। यही कारण है कि यह 4 नई टंकियां शहर में बनाई जा रही हैं।

अभी 9 टंकियों से की जा रही सप्लाई 

वर्तमान में शहर में पानी की सप्लाई 9 टंकियों से की जा रही है। शहर में 17400 नल कनेक्शन हैं वहीं पाइप लाइन का नेटवर्क करीब 190 किलोमीटर है। फिलहाल नगर पालिका द्वारा रोजाना 90 लाख लीटर पानी की सप्लाई करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि अभी शहरवासियों को एक दिन के अंतराल से पानी की सप्लाई की जाती है। 

टंकी बन जाएगी पर पानी कहां से लाएंगे

नई टंकियों के निर्माण से एक बात यह भी साफ हो रही है कि यहां विधिवत प्लानिंग जैसी कोई चीज होती ही नहीं है। इसका प्रमाण यह है कि टंकियों को भरने के लिए अतिरिक्त पानी की भी व्यवस्था करना होगा। अभी नपा ने पानी की कोई व्यवस्था की ही नहीं, लेकिन टंकियों का निर्माण शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि बेहतर होता कि नगर पालिका पहले पानी का स्रोत तलाश कर उसकी व्यवस्था करती और वह निश्चित हो जाने पर टंकी का निर्माण शुरू करती। 

नई टंकी साल भर से पड़ी है खाली 

बिना किसी ठोस प्लानिंग के काम कराए जाने का ही नतीजा है कि शहर के कोठीबाजार क्षेत्र में ज्योति टॉकीज के सामने बनाई गई एक टंकी साल भर बाद में भी उपयोग में नहीं आ सकी है। इस टंकी को बने हुए करीब एक साल हो चुका है। इसके बावजूद इस टंकी को न तो कनेक्ट किया गया है और न ही एक बार भी इसे भरा गया है। यह देख कर लोग यह भी कह रहे हैं कि नई बनने वाली टंकियों का हश्र भी कहीं इसी तरह का न हो।