Temperature Impact on Wheat Crop: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। मौसम में हो रहे परिवर्त्तन और कड़ाके की ठंड के लिए पहचाने जाने वाले दिसम्बर-जनवरी माह में ही इस साल अधिकतम तापमान २६ डिग्री सेल्सियस के पार होने से जनवरी के पहले सप्ताह में ही गेहूं में बाली आ गई है। जबकि कई स्थानों में दिसम्बर माह तक भी गेहूं की बोवनी होते रही है। जनवरी माह में गेहंू की बाली आने से गेहूं का उत्पादन भी प्रभावित होने की संभावना है। तापमान बढ़ने से गेहूं में बाली आने के साथ ही आम के कई पेड़ों में बौर भी आ गई है।

ठंड का सीजन नवम्बर माह से शुरू होकर फरवरी माह तक चलता है। जिले दिसम्बर और जनवरी माह में कड़ाके की ठंडी पड़ती है। रबी फसलों की प्रमुख फसल गेहूं की बोवनी भी नवम्बर-दिसम्बर माह में की जाती है, जो फरवरी-मार्च में पकती है। आमतौर पर जनवरी माह के अंतिम सप्ताह से फरवरी माह की शुरूवात में गेहूं की फसल में बाली आती है। दिसम्बर जनवरी माह में न्यूनतम तापमान १० डिग्री के आसपास और अधिकतम तापमान २० से २२ डिग्री के आसपास रहता है, लेकिन इस साल जिले में न्यूनतम तापमान ७ डिग्री से कम नहीं हुआ है वहीं अधिकतम तापमान तो दिसम्बर माह में ही २५ डिग्री सेल्सियस के पार हो गया वहीं जनवरी माह की शुरूवात में २६ डिग्री सेल्सियस के पार हो गया जिससे दिन के समय गर्मी का अहसास होते रहा है। 

अधिकतम तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल भी प्रभावित हो रही है। कुछ स्थानों पर जनवरी माह की शुरूवात में ही गेहूं में बाली आ गई है। जबकि कुछ किसानों ने दिसम्बर माह के तीसरे चौथे सप्ताह तक भी गेहूं की बोवनी होते रही है। जनवरी माह में बाली आने वाले गेहूं फरवरी माह तक पक जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार बसंत ऋतु के दौरान अधिक हवाएं चलने से गेहूं की फसल प्रभावित होगी। उस समय गेहूं के ढाने भर जाने से पौधे गिरने की संभावना भी अधिक रहती है। जनवरी माह में गेहूं की बाली आने से किसान भी चितिंत है।