Betul Trenching Ground: कार्यवाही की जगह ठेका कंपनी पर मेहरबानी, ट्रेचिंग ग्राउंड का कचरा हटाने मिलेगा 20% अतिरिक्त भुगतान
Betul Trenching Ground: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। शहर के गौठाना स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड से कचरा हटाने का काम कर रही कंपनी पर मेहरबानियों का सिलसिला जारी है। कुछ समय पहले ही धेले का काम नहीं होने के बावजूद करोड़ों का भुगतान होने को लेकर चर्चा में आई कंपनी की जांच-पड़ताल के नाम पर प्रशासन ने एक दल बनाया था। इस दल की आज तक न रिपोर्ट सामने आई और न ही कंपनी पर कोई कार्रवाई ही हुई। इसके बाद चर्चा थी कि कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की तैयारी है, लेकिन हुआ इसके उल्टा। चर्चा है कि कंपनी को अब ठेके की राशि से 20 प्रतिशत ज्यादा का भुगतान होगा।
जानकारी के अनुसार ट्रेचिंग ग्राउंड पर जमा कचरे की प्रोसेसिंग कर हटाने का ठेका 5 करोड़ 70 लाख रुपये में दिया गया है। कुछ समय पहले इस मामले में इस बात को लेकर जमकर हल्ला मचा था कि कंपनी ने कचरा हटाने का कुछ काम किया नहीं और उसे करोड़ों का भुगतान हो गया है। नपा सूत्रों का भी दावा है कि ठेके की राशि में से 2.20 करोड़ रुपये का भुगतान कंपनी को किया जा चुका है। इसी मामले को लेकर प्रशासन द्वारा एक जांच दल गठित किया गया था। इस दल को वैसे तो 7 दिनों में ही रिपोर्ट सौंपना था, लेकिन मजे की बात यह है कि करीब दो महीने बाद भी न तो जांच पूरी हो पाई है और न ही कोई कार्रवाई हो सकी है। अब तो ऐसा लग रहा है कि पूरा मामला ही ठंडे बस्ते में जा चुका है।
कंपनी को किया जाना था ब्लैक लिस्टेड
पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि कंपनी की लापरवाह कार्यशैली की खबर राजधानी तक पहुंच चुकी है। ऐसे में भोपाल से एक टीम आएगी और ट्रेचिंग ग्राउंड का निरीक्षण कर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्यवाही की जाएगी। नपा सूत्रों के अनुसार रविवार को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के उप संचालक नीलेश दुबे बैतूल आए और ट्रेचिंग ग्राउंड का निरीक्षण भी किया। हालांकि जैसी चर्चा थी, वैसा कुछ भी नहीं हुआ।
नए-पुराने कचरे में फिर उलझाया कंपनी ने
बताया जाता है कि अधिकारियों द्वारा जब ट्रेचिंग ग्राउंड का निरीक्षण किया गया तो ठेका कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने नए-पुराने कचरे की बात कहकर एक बार फिर उलझा दिया। कंपनी द्वारा पहले भी कचरा हटाने के बजाय नया कचरा बताकर अपनी नाकामी पर पर्दा डालने का काम किया जाता रहा है। दूसरी ओर अधिकारियों ने भी हकीकत जानने की जगह कंपनी की ही बातें मान ली और कोई सख्त कार्रवाई करने की जगह उल्टे कंपनी का ही भला करने के निर्देश देकर चले गए।
राशि बढ़ाकर दिए जाने की दिए निर्देश
नपा सूत्रों का दावा है कि उप संचालक द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि कचरा चाहे पुराना हो या नया हो, अब सारा कचरा कंपनी को ही हटाना होगा। इसके लिए कंपनी को ठेका राशि के अलावा 20 प्रतिशत और भुगतान किया जाएं। इसके लिए उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को नपा की बैठक करके निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि इस कार्य को 30 जनवरी तक पूरा करने को भी उप संचालक ने कहा है।
कहीं इसलिए तो नहीं आया यह आंकड़ा?
चर्चा इस बात की भी है कि शासन से जितनी राशि नगर पालिका को मिली थी, उससे 20 प्रतिशत कम पर कंपनी ने ठेका लिया था। यदि यह राशि बच जाती तो यह 20 प्रतिशत राशि शासन को वापस चली जाती। यही कारण है कि इस राशि को भी खर्च करने और कंपनी को ज्यादा से ज्यादा उपकृत करने के लिए अफसरों ने यह दांव खेला है। बहरहाल, इस पूरे मामले से यह साफ हो गया है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी उस क्षेत्र के वासियों को कचरे से निजात मिले या न मिले और कंपनी भले ही धेले का काम नहीं करें पर कंपनी का बाल भी बांका नहीं होगा। ऐसा नहीं होता तो कंपनी पर कब की गाज गिर चुकी होती।

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