Betul Municipal Council Meetings: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नगरीय निकायों में परिषद के सम्मेलन का बेहद महत्व होता है। यही वह मंच होता है जहां नागरिकों द्वारा चुने गए पार्षद अपने वार्डों की समस्या या मांग रख सकते हैं या किसी बात पर विरोध दर्ज करवा सकते हैं। लेकिन, बैतूल नगर पालिका में पार्षदों को यह मौका ही नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह यह है कि यहां पर सम्मेलनों के आयोजन में बेहद कंजूसी बरती जा रही है। यह कंजूसी किस कदर बरती जा रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते साल मात्र 2 सम्मेलन हुए और वर्तमान परिषद के कुल 40 महीनों के कार्यकाल में मात्र 10 सम्मेलन हुए हैं। 

किसी भी बड़े प्रोजेक्ट या योजना को अनुमति देने के के निर्णय सम्मेलन में ही लिए जा सकते हैं। 40 लाख से अधिक के कार्यों की मंजूरी सम्मेलन में ही मिल सकती है। पार्षद भी अपने वार्डों के लिए कार्यों की मांग यहां कर सकते हैं या उपेक्षा का विरोध जता सकते हैं। इसके अलावा यदि किसी कार्य अथवा नीति का विरोध करना चाहे तो वह भी वे यहीं कर सकते हैं। इसके अलावा नगर पालिका द्वारा किए जाने वाले खर्चों का हिसाब-किताब भी मांग सकते हैं। कुल मिलाकर जिस तरह संसद या विधानसभाओं के सत्रों का जिस तरह से महत्व है, वही महत्व नगरीय निकायों में सम्मेलन का है। 

सम्मेलन को लेकर शासन की यह अपेक्षा 

सम्मेलन के इस महत्व को देखते हुए ही नगर पालिका अधिनियम में भी यह अपेक्षा की गई है कि कम से कम 2 महीने में एक बार सम्मेलन जरुर बुलाना चाहिए। हालांकि ऐसा अनिवार्य नहीं है, लेकिन पार्षदों को पर्याप्त अवसर देने के लिए 2 महीने में एक बार सम्मेलन होने ही चाहिए। सम्मेलन बुलाने के औपचारिक अधिकार अध्यक्ष को होते हैं। बैठक की तिथि, समय और एजेंडा अध्यक्ष की अनुमति से तय होते हैं। 

बीते साल बैतूल में मात्र 2 सम्मेलन हुए

शासन ने सम्मेलन को लेकर जो अपेक्षा की है, वह अपेक्षा बैतूल में हर्गिज पूरी होती नजर नहीं आ रही है। वर्तमान परिषद का गठन अगस्त 2022 में हुआ था। उसके बाद से आज तक की स्थिति देखें तो बैतूल नगर पालिका में मात्र 10 सम्मेलन हुए हैं। इनमें 5 सम्मेलन तो वर्ष 2024 में हो गए थे। वहीं 2022 में 1, 2023 में 2 और 2025 में 2 सम्मेलन हुए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बैतूल शहर के पार्षदों को कितना मौका मिल पा रहा है। इसी उपेक्षा से कई पार्षद खासे नाराज भी चल रहे हैं। 

पीआईसी बैठकों के भी यही हैं हाल 

सम्मेलन की तरह ही पीआईसी की बैठकों के भी हाल है। इसी अवधि में बैतूल नगर पालिका की मात्र 12 पीआईसी की बैठकें हुई हैं। यह बैठक नगर पालिका अध्यक्ष की अध्यक्षता में होती है और सभी सभापति इसमें शामिल होते हैं। इस बैठक में एक विषय पर 40 लाख रुपये तक के प्रस्ताव पर निर्णय लिए जा सकते हैं। अधिकांश पीआईसी की बैठक में ही ले लिए जाते हैं, इसलिए सम्मेलन पर नगर पालिका का अधिक जोर नहीं रहता और इस कवायद में पार्षदों को कहीं कोई मौका ही नहीं मिलता।

वार्डवासियों को नहीं दे पाते जवाब 

सम्मेलन नहीं होने का खामियाजा पार्षदों को भुगतना होता है। सम्मेलन नहीं होने से वे न अपनी उपेक्षा का दर्द बता पाते हैं और न ही अपने वार्डों के लिए कार्यों की मांग ही दमदारी से कर पाते हैं। कई पार्षद तो ऐसे हैं जिनके छोटे-छोटे काम तक अटके रहते हैं। जिसके चलते न उनकी छवि वार्डवासियों के बीच खराब होती है, बल्कि कई पार्षदों को तो लोगों से खरी-खोटी तक सुनना पड़ता है। क्षेत्र में काम नहीं होने पर लोग तो सारा गुस्सा पार्षदों पर उतार लेते हैं, लेकिन दूसरी ओर पार्षदों को यह मौका भी नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि पार्षदों ने जल्दी-जल्दी और नियमित रूप से सम्मेलन बुलाए जाने की मांग की है। इस संबंध में चर्चा करने के लिए नपा अध्यक्ष पार्वती बाई बारस्कर से उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया। इससे उनसे चर्चा नहीं हो पाई। 

कब-कब हुए सम्मेलन और पीआईसी की बैठक

नगर पालिका की वर्तमान परिषद बनने के बाद पहला सम्मेलन 21 अक्टूबर 2022 को हुआ था। इसके बाद 2023 में 20 मार्च और 19 अगस्त को सम्मेलन हुए। वर्ष 2024 में 5 फरवरी, 28 फरवरी, 30 जुलाई, 26 सितंबर और 11 दिसंबर को सम्मेलन हुए। वहीं 2025 में 27 मार्च और 7 अगस्त को सम्मेलन हुए। इसी तरह पीआईसी की पहली बैठक 8 सितंबर 2022 को और दूसरी 21 दिसंबर को हुई थी। वर्ष 2023 में 17 मार्च, 17 जुलाई (की स्थिगित बैठक 24 जुलाई को) और 19 दिसंबर को हुई। वर्ष 2024 में 27 फरवरी, 15 मार्च और 8 अक्टूबर को बैठक हुई। वहीं 2025 में 9 जनवरी, 24 मार्च, 31 जुलाई और 24 दिसंबर को पीआईसी की बैठक हुई।