Betul Sewerage Project: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बैतूल शहर के लिए जल्द ही सड़कों पर बहता गंदा पानी और खुली नालियां अतीत की बात हो जाएगी। यही नहीं भविष्य में बनने वाले मकानों में सेप्टिक टैंक बनाने की जरुरत भी नहीं होगी। पूरा शहर गंदे पानी से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। यह सब सीवरेज प्रोजेक्ट के कारण संभव हो सकेगा। इस प्रोजेक्ट का काम करीब एक अरब रुपये की लागत से कराया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को शासन से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर भी बुलवा लिए गए हैं। 

सीवरेज प्रोजेक्ट का उद्देश्य शहर के घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक संस्थानों से निकलने वाले गंदे पानी को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र कर उसका उपचार करना है। अभी अधिकांश क्षेत्रों में सेप्टिक टैंक या खुले नालों के जरिए अपशिष्ट जल का निस्तारण किया जाता है। जिससे भूजल प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बने रहते हैं। सीवरेज प्रोजेक्ट के लागू होने से यह समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।

अमृत 2.0 परियोजना के तहत मंजूरी 

सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए अमृत 2.0 परियोजना के तहत मंजूरी मिली है। अगले 30 सालों की जरुरतों को देखते हुए यह प्रोजेक्ट बनाया गया है। वर्ष 2055 में शहर की आबादी 183045 होने का अनुमान है। इस प्रोजेक्ट पर 85.38 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से लगेगी। इस तरह करीब 1 अरब रुपये इस प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे। 

मूल्यांकन के लिए भोपाल भेजे टेंडर 

इस कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित कर लिए गए हैं। कुल 8 टेंडर आए हैं। इन सभी को तकनीकी मूल्यांकन के लिए शासन को भिजवाया गया है। शासन स्तर पर ही तय होगा कि कौन-कौन से टेंडर खुलने लायक है। शासन से दिशा निर्देश मिलने के बाद टेंडर खोले जाएंगे। यह पूरी प्रक्रियाएं होने के बाद अगले 2 महीने में इस कार्य के शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। 

इस तरह बिछेगा सीवरेज नेटवर्क 

सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत शहर में करीब 120 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसे लोगों के घरों में सेप्टिक टैंक से कनेक्ट किया जाएगा। इसमें कुल 17655 कनेक्शन किए जाएंगे। अभी सेप्टिक टैंक का गंदा पानी सीवरेज नेटवर्क में लिया जाएगा। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद में बनने वाले मकानों में सेप्टिक टैंक बनाने की जरुरत भी नहीं रहेगी। 

तीन जगह बनाए जाएंगे पंपिंग स्टेशन

सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत गंदे पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक नेचुरल ग्रेविटी से पहुंचाया जाया जाएगा। हालांकि कई स्थान ऐसे हैं जहां ढलान नहीं होने से ऐसा संभव नहीं हो सकेगा। इसलिए 3 स्थानों पर पानी पंप करके आगे बढ़ाने के लिए पंपिंग स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं। पूरे शहर के सीवरेज नेटवर्क पर पीएलसी स्काडा से नजर रखी जाएगी। 

नागपुर नाका पर बनेगा एसटीपी 

पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए नागपुर नाका पर स्थित पीडब्ल्यूडी की पुरानी वर्कशॉप वाले स्थान पर एसटीपी बनाया जाएगा। इसकी क्षमता 16 एमएलडी की होगी। यहां शहर भर से आने वाले पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा। इसके बाद इस पानी को या तो नदी में छोड़ दिया जाएगा या फिर अन्य किसी उपयोग में लिया जाएगा। पूरे शहर को 3 जोन में बांटा जाएगा। 

इन समस्याओं से मिल सकेगी राहत

सीवरेज प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद शहरवासियों को सेप्टिक टैंक की सफाई, ओवरफ्लो और बदबू जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। इसके साथ ही बरसात के मौसम में नालियों के चोक होने और गंदा पानी सड़कों पर फैलने की समस्या भी कम होगी। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।

पहले उठाना होगा लोगों को दिक्कत 

इस प्रोजेक्ट से भविष्य में लोगों को खासी राहत मिलेगी और शहर स्वच्छ रहेगा। लेकिन, प्रोजेक्ट का जितने समय काम चलेगा, तब तक परेशानियों से भी जूझना होगा। प्रोजेक्ट के लिए एक बार फिर शहर की सड़कों की खुदाई होगी। इससे यातायात पर भी असर पड़ेगा। कई बार पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित होगी। हालांकि काम पूरा होने के बाद खासी राहत मिल सकेगी।