Betul Mandi News: मंत्री जी, जब नोटिस ही नहीं दिए तो कैसे होगी वसूली? बिना पुख्ता जानकारी के कृषि उपज मंडी पहुंचे प्रभारी मंत्री
Betul Mandi News: बैतूल(राष्ट्रीय जनादेश)। नाम कृषि उपज मंडी, बैतूल लेकिन काम किसानों के हित में नहीं, सिर्फ व्यापारियों के हित में होगा। बैतूल मंडी लगता है प्रशासन के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की पकड़ से बाहर निकल गई है और पूरी तरह से व्यापारियों की गिरफ्त में है। कलेक्टर के निर्देश पर एक सप्ताह पहले एसडीएम बैतूल स्वयं मंडी जाकर व्यापारियों पर जुर्माना लगाते हैं लेकिन मंडी प्रबंधन कलेक्टर और एसडीएम को अंगूठे पर रखता है और जुर्माने के नोटिस व्यापारियों को तामिल तक नहीं करता। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंडी में व्यापारियों की दादागिरी किस हद तक चलती है? भाजपा-कांग्रेस के किसान हितैषी संगठन और भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों के मुंह पर तो मानो किसान हित की बात करने के लिए टेप चिपका दिए गए हैं।
गुरुवार को पत्रकारों की शिकायत पर मंडी का औचक निरीक्षण करने पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कलेक्टर और एसडीएम की मौजूदगी में मंडी प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए तीन दिन में जुर्माना वसूल करने और वसूली नहीं होने पर व्यापारियों का लाइसेंस निरस्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं। दुखद बात यह है कि प्रशासन के नुमाइंदों ने प्रभारी मंत्री को यह बताना भी उचित नहीं समझा कि एक सप्ताह पूर्व व्यापारियों पर जो फाइन कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने लगाया था। मंडी प्रबंधन ने उसके नोटिस आज दिनांक तक व्यापारियों को नहीं दिए हैं। जब व्यापारियों को नोटिस ही जारी नहीं किए गए तो फिर तीन दिन में मंत्री के निर्देश पर जुर्माना कैसे वसूल होगा? यह बड़ा प्रश्र है। वहीं यह भी सवाल चर्चा में है कि जो मंडी प्रबंधन व्यापारियों को जुर्माने के नोटिस तामिल नहीं करा पाया वो उनके लाइसेंस निरस्त करने का दम कैसे दिखा पाएगा?
किसानों के हित का दावा करने वाले और कृषि को फायदा का धंधा बनाने वाली भाजपा सरकार में किसानों की दुर्दशा पर जनप्रतिनिधि और अधिकारी कितने गंभीर है? यह एक बार फिर गुरुवार को साबित हो गया। मंडी के टॉप टू बॉटम अधिकारी-कर्मचारी यहां के व्यापारियों से इस तरह मिले हुए हैं कि उनके द्वारा कलेक्टर, एसडीएम के साथ ही अब प्रभारी मंत्री को भी गुमराह कर दिया गया है। मंडी के भारसाधक अधिकारी द्वारा लगभग एक सप्ताह पूर्व 12 व्यापारियों पर लगाया गया 5 लाख 83 हजार रुपए के जुर्माने के मामले में भी प्रभारी मंत्री को गुमराह किया गया है।
मंत्री ने भले ही सार्वजनिक तौर पर तीन दिन में सभी 12 व्यापारियों से जुर्माना वसूलने या फिर उनका लाइसेंस निरस्त कर उनका अनाज जब्त करने की बात कही है। लेकिन जो मंडी प्रबंधन जुर्माना लगाने के 11 दिन बाद भी व्यापारियों को नोटिस तक जारी नहीं कर पाया क्या वह लाइसेंस निलंबित करने की कार्यवाही कर पाएगा? यह उम्मीद करना सरासर बेमानी होगा। प्रभारी मंत्री के जाने के बाद कलेक्टर एवं एसडीएम व्यवस्थाएं दुरूस्त करने का प्रयास करते रहे लेकिन व्यवस्था कितनी सुधरेगी यह आने वाले एक-दो दिन में नजर आ जाएगा?
कृषि उपज मंडी में बदत्तर हो चुकी व्यवस्थाओं और अन्नदाताओं की परेशानियों को देखते हुए गुरुवार को प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल कृषि उपज मंडी का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। यहां किसानों से चर्चा में जब किसानों ने मंडी में हो रही अव्यवस्थाओं से उन्हें अवगत कराया तो प्रभारी मंत्री नाराज हो गए। किसानों ने प्रभारी मंत्री को बताया कि मंडी में हम्मालों की खुली लूट हो या उपज बेचने के बाद भुगतान के लिए 8-10 दिन तक व्यापारियों के चक्कर काटने की बात हो, या फिर मंडी में 8-8, 10-10 दिन व्यापारियों के बोरे मंडी परिसर में रखे होने की बात हो, सभी मामलों में मंडी प्रबंधन व्यापारियों का पक्ष लेता है। वहीं किसानों को मंडी में उपज लाने के लिए सिर्फ 5 घंटे का समय दिया जा रहा है जिससे किसान परेशान हैं।
किसानों की समस्या सुनने के बाद मंत्री ने मंडी प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए कि उपज की तुलवाई-नीलामी क्रम में की जाए इसके लिए व्यवस्थित सिस्टम बनाए। उपज का उठाव 24 घंटे में करना सुनिश्चित करें। जिन 12 व्यापारियों पर 5.83 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है उनसे 3 दिन में जुर्माना वसूल करें अन्यथा उनका लाइसेंस निरस्त कर बोरे जब्त करने की कार्यवाही करें।
प्रभारी मंत्री ही यह निर्देश देकर चले गए लेकिन उन्हें मंडी प्रबंधन ने यह बताना जरूरी नहीं समझा कि 11 दिन बीतने के बाद भी जुर्माने के नोटिस अभी तक व्यापारियों को तामील नहीं कराए गए हैं। सातनेर के किसान पवन ने बताया कि उसने 31 दिसम्बर और 3 जनवरी को मक्का बेची थी लेकिन अभी तक उसका भुगतान ही नहीं हुआ है।
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने इस शिकायत पर तुरंत व्यापारी को फोन कर भुगतान करने के निर्देश दिए जिस पर व्यापारी के प्रतिनिधि ने तुरंत मंडी पहुंचकर किसान को भुगतान की बात कही लेकिन सुरक्षा कारणों से किसान ने रात में भुगतान लेने से मना कर दिया। एसडीएम और मंडी के भार साधक अधिकारी अभिजीत सिंह ने देर रात तक मंडी प्रबंधन और राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर मंडी में व्यवस्था दुरूस्त करने की रणनीति बनाई।

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