e-PACS Online System: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले की किसी भी प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समिति (पैक्स) में अब किसानों को अपने कार्यों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। इतना ही नहीं अब उनके साथ किसी तरह की धोखाधड़ी भी नहीं हो सकेगी। यह इसलिए संभव हो सकेगा क्योंकि 31 जनवरी तक सभी 91 सहकारी समितियां पूर्णत: कंप्यूटरीकृत और ऑनलाइन हो जाएंगी। समितियों को ई-पैक्स बनाने का कार्य इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रहा है। 

सहकारी समितियों में काम तेजी से करने, कार्यों में पारदर्शिता लाने और हर तरह की गड़बड़ी पर अंकुश लगाने के लिए नाबार्ड की कूप्स (सीओओपीएस) योजना के तहत सभी सहकारी समितियों (पैक्स) को ई-पैक्स बनाया जा रहा है। इसमें न केवल इनका पूरी तरह से कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है बल्कि सारा कार्य ऑनलाइन भी किया जा रहा है। इसके लिए सभी पैक्स को कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, मोडम आदि संसाधन मुहैया करा दिए गए हैं। लंबे समय से चल रही इस कवायद के तहत सभी पैक्स का डेटा अपडेशन का कार्य किया जा चुका है। सभी पैक्स में ऑपरेटर पहले से हैं, लेकिन जहां अतिरिक्त जरुरत थी उन 60 पैक्स में दैनिक वेतन भोगी आधार पर डेटा फीड और इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग के लिए अलग से सहायक रखे गए हैं। 

अभी तक इतनी पैक्स ऑनलाइन 

अभी तक जिले की 51 सहकारी समितियां ई-पैक्स बनाई जा चुकी है। ये पूरी तरह से ऑनलाइन हो चुकी हैं। शेष 40 पैक्स में भी तेजी से काम चल रहा है। इन्हें भी 31 जनवरी तक हर हाल में ई-पैक्स बना दिया जाएगा। कुछ पैक्स वाले क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को देखते हुए वहां वीपीएन (सैटेलाइट इंटरनेट) सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि ऐसी पैक्स 4-5 ही हैं। 

किसानों को होंगे इतने सारे लाभ 

ई-पैक्स बन जाने पर किसानों को कई लाभ मिलेंगे। पैक्स से जुड़े उनके सभी कार्य फटाफट होंगे, जिससे उन्हें कतार में लंबा इंतजार नहीं करना होगा। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उनके साथ अब किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं होगी। उनके एक-एक लेन-देन का हो या खाद आदि लेने का, हर गतिविधि की सूचना उन्हें एसएमएस के जरिए तत्काल मिलेगी। इसके अलावा ऋण की स्वीकृति हो या राशि लेने का कार्य हो, इनमें भी अब समय नहीं लगेगा। ऑनलाइन रिकॉर्ड होने से हर जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। दूसरी ओर पैक्स के कर्मचारियों का काम भी आसान हो जाएगा। 

ऐसे समझे, कैसे तेजी से होगा काम

अभी एक किसान खाद लेने जाता है तो उसका परमिट 4 कॉपियों में बनता है। पूरी डिटेल भरने में कम से कम 10 मिनट लगते हैं। यह 4 कॉपियां 4 अलग-अलग जाती है। इसके बाद समिति से पूरा रिकॉर्ड ग_ों में बैंक जाता है। बैंक से इसे अपलोड किया जाता है। इस सारी कवायद में एक दिन में बमुश्किल 50 किसानों को ही खाद वितरण हो पाता है। ई-पैक्स बनने से किसान का सारा डेटा अपलोड रहने से चुटकियों में परमिट कट जाएगा और रियल टाइम में ही सभी दूर एंट्री भी हो जाएंगी। इससे पैक्स कर्मचारियों का समय तो बचेगा ही एक ही दिन में 150 से 200 किसानों को खाद भी मिल सकेगा। 

किसानों को एक यह लाभ भी मिलेगा

ई-पैक्स हो जाने से किसानों को एक बड़ा लाभ और मिलेगा। दरअसल, इसके बाद पैक्स को मल्टी टास्किंग भी बनाया जाएगा। मतलब, पैक्स केवल खाद और ऋण देने का कार्य ही नहीं करेगी बल्कि अन्य काम भी करेगी। इसके तहत ई-पैक्स में इफ्को एमसी के स्टोर भी शुरू होंगे। इन स्टोर्स में किसानों को बिना नकदी राशि अदा किए और बाजार से सस्ते दाम में कीटनाशक भी मिल सकेगा। इसके अलावा पैक्स को भी 12 प्रतिशत का कमीशन मिलेगा। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। इसके लिए अभी भीमपुर पैक्स को लाइसेंस भी मिल चुका है। जल्द ही सभी 91 पैक्स को भी लाइसेंस मिल जाएगा। 

गैस एजेंसी से पैक्स का टाइअप 

अन्य कार्यों की कड़ी में दामजीपुरा पैक्स ने भी गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए दामजीपुरा पैक्स का भारत गैस से टाइअप हुआ है। कंपनी ने पैकस को 6 सिलेंडर रखने एवं बुकिंग करने की अनुमति दे दी है। पैक्स को एक बुकिंग पर 10 रुपये और 20 रुपये प्रति सिलेंडर कमीशन मिलता है। पर्याप्त बुकिंग होने पर पैक्स गैस गाड़ी बुलवा लेती है जिससे स्थानीय स्तर पर ही किसानों को सिलेंडर मिल जाते हैं और पैक्स को अतिरिक्त आय भी हो जाती है। 

मल्टी टास्किंग बन रही पैक्स: उप आयुक्त 

इस संबंध में सहकारिता विभाग बैतूल के उपायुक्त केके शिव कहते हैं कि आगामी 31 जनवरी तक सभी पैक्स को ई-पैक्स बना दिया जाएगा। इससे किसानों के सभी कार्य कम समय में हो जाएंगे वहीं उनके साथ धोखाधड़ी भी नहीं होगी। इसके अलावा पैक्स को मल्टी टास्किंग भी बनाया जा रहा है। इससे किसानों के साथ ही पैक्स को भी फायदा होगा।