Sand Mining in Betul District: जिले में 15 नई रेत खदानें जल्द होंगी शुरू, क्या इससे रेत के दामों में आएगी कमी?
Sand Mining in Betul District: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले में जल्द ही 15 नई रेत खदानें शुरू होने वाली हैं। इन नई खदानों को स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा माइनिंग प्लान भी अप्रूव हो चुका है और सर्वे रिपोर्ट भी बन चुकी है। अब इसे पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए सिया (स्टेट लेवल इम्पेक्ट असेस्मेंट अथॉरिटी) को भिजवाया जाएगा। सिया की अनुमति मिलते ही इन खदानों से रेत निकालना शुरू हो जाएगा। वर्तमान में जिले में 33 खदानें चल रही हैं। नई खदानें शुरू होने पर इनकी संख्या 48 हो जाएंगी।
नदियों में कई स्थान ऐसे होते हैं जहां पर बड़ी मात्रा में रेत होती है, लेकिन उन्हें खदान घोषित नहीं किया जाता। इसके चलते उन स्थानों को बतौर खदान नीलाम भी नहीं किया जाता, लेकिन वास्तविकता यही है कि ऐसे स्थानों से अवैध रूप से रेत निकलती रहती है। इससे शासन को राजस्व का खासा नुकसान होता है। यही कारण है कि समय-समय पर ऐसे स्थानों को चिन्हित कर इन्हें विधिवत रूप से रेत खदान घोषित कर नीलाम किए जाने की कार्यवाही की जाती है। विधिवत खदान घोषित हो जाने से इन्हें बाकायदा नीलाम किया जा सकता है और शासन को राजस्व प्राप्त होता है।
अभी जिले में 33 खदानें संचालित
पहले जिले में 42 रेत खदानें थीं। हालांकि इनमें से 9 को सिया की अनुमति नहीं मिल सकी। इसके चलते इन खदानों को बंद कर दिया गया। शेष 33 खदानों से वर्तमान में रेत निकाली जा रही है। अब 15 नई खदानों को मंजूरी मिलने के बाद जिले में खदानों की संख्या बढ़कर 48 हो जाएंगी। इससे रेत भी अधिक मात्रा में निकाली जा सकेगी। नई खदानों को नवंबर माह में मंजूरी मिली थी। उसके बाद स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन ने माइनिंग प्लान बनाया, जिसे अप्रूवल मिल चुका है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है।
इन 15 खदानों को मिली मंजूरी
जिले में जिन 15 नई खदानों को मंजूरी मिली है, उनमें घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की बंजारीढाल पंचायत में भडं़गा नदी पर चिचडोल रैयत खदान, सातलदेही पंचायत में तवा नदी पर बांसपुर खदान, नूतनडंगा पंचायत में भड़ंगा नदी पर हिरनघाटी खदान, सातलदेही पंचायत में लोहार नदी पर कैली रैयत खदान, शाहपुर ब्लॉक में चिखलीरैयत पंचायत में मोरंड नदी पर तेंदूखेड़ा खदान, पाठई पंचायत में माचना नदी पर पाठई खदान, गुवाड़ी पंचायत में तवा नदी पर गुवाड़ी-1, गुवाड़ी-2 गुवाड़ी-3 और डेंडूपुरा-1 खदान, डाबरी पंचायत में मोरंड नदी पर डाबरी खदान, भौंरा पंचायत में तवा नदी पर गुरगुंदा-1 और गुरगुंदा-2 खदान तथा चिचोली ब्लॉक में खपरिया पंचायत में मोरंड नदी पर खपरिया उर्फ परसदा-1 और 2 खदानें शामिल हैं। इन खदानों का कुल रकबा 55.360 हेक्टेयर है और इनसे 9 लाख, 99 हजार, 847 घनमीटर रेत निकाली जा सकेगी।
अभी पुरानी कंपनी को ही दी जाएंगी
नई खदानों को सिया से अनुमति मिलने के बाद अभी इनको नीलाम नहीं किया जाएगा। इसकी जगह इन खदानों को वर्तमान में जिले में रेत खनन कर रही कंपनी को ही दिया जाएगा। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि पुरानी कंपनी को 10 लाख घनमीटर क्षमता की खदानें दी गई थी, लेकिन इतनी रेत निकल नहीं पा रही हैं। इसके चलते यह खदानें उसी कंपनी को दी जाएगी। कंपनी ने 27 करोड़, 27 लाख रुपये में जिले की खदानों का ठेका लिया था। यह राशि हर साल 10 प्रतिशत बढ़ जाती है। इस साल नवंबर माह में यह ठेका समाप्त हो रहा है। कंपनी चाहे तो इसे 2 साल के लिए बढ़ा भी सकती है।
क्या रेत के भाव पर भी पड़ेगा असर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नई रेत खदानें शुरू होने से रेत के भाव पर भी असर पड़ेगा? इस बारे में खनिज अधिकारियों का कहना है कि इससे रेत के भाव पर असर पड़ने की संभावना बिल्कुल नहीं है। इसका कारण है कि अभी सीधे नदियों से रेत निकालना शुरू नहीं हो पाया है क्योंकि नदियों में पानी है। अभी जो रेत सप्लाई हो रही है, वो वह रेत है जो कि बारिश से पहले निकाल कर स्टोर कर ली गई थी। सीधे नदियों से रेत निकाल कर जब सप्लाई होगी, तब हो सकता है कि इसमें कुछ कमी हो जाए। हालांकि यह बात दावें से नहीं कही जा सकती, बल्कि केवल संभावना है। केवल नई खदानें शुरू होने से कोई सीधा असर रेत के भाव पर नहीं पड़ेगा।
नई खदानों को लेकर बोले अधिकारी
इस पूरे मामले को लेकर खनिज विभाग के उप संचालक मनीष पालेवार का कहना है कि जिले में 15 नई खदानों को नवंबर माह में स्वीकृति मिली थी। इसके बाद स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन ने माइनिंग प्लान बनाया, जो कि अप्रूव हो चुका है। सर्वे रिपोर्ट भी बनाई जा चुकी है। सिया की अनुमति मिलते ही नई खदानें शुरू कर दी जाएंगी।

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