Betul Janpad Panchayat Fraud: जनपद पंचायत में 40 लाख के फर्जीवाड़े पर कार्रवाई, दो माह बाद दर्ज हुई एफआईआर
Betul Janpad Panchayat Fraud: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जनपद पंचायत बैतूल में छात्रावासों के बिजली बिल भुगतान के नाम पर 40 लाख से ज्यादा राशि के गबन मामले में पुलिस ने आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले का खुलासा अक्टूबर माह में हुआ था। उसी माह मामले की शिकायत भी की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद अब आरोपियों पर प्रकरण दर्ज कर लिया है।
जनपद पंचायत बैतूल में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों के बिजली बिल भुगतान में गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं शासकीय राशि के गबन का मामला सामने आया था। मामले की जांच कराए जाने के बाद जनपद पंचायत द्वारा जांच प्रतिवेदन पुलिस के समक्ष प्रस्तुत कर आरोपियों पर कार्यवाही को कहा गया था। इसके बाद पुलिस ने भी मामले में जांच की और आरोपी छत्रपाल मर्सकोले (कम्प्यूटर ऑपरेटर) और धर्मेंद्र वरकड़े (वेंडर) सहित अन्य के विरुद्ध धारा 420, 409 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। साथ ही प्रकरण में संलिप्त अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सवा पांच लाख रुपये कराए जमा
अब तक की जांच में 40 लाख 04 हजार 67 रुपये के गबन की बात सामने आई है। जिसमें से 5 लाख 24 हजार 182 रुपये की राशि शासकीय चालान के माध्यम से शासन के खाते में जमा कराई जा चुकी है।
ऑपरेटर ने बनाए थे फर्जी वेंडर
छात्रावासों के बिजली बिलों का भुगतान जनपद पंचायत के डीडीओ कोड 0305802019 के अंतर्गत किया जाता है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर छत्रपाल मर्सकोले द्वारा आईएफएमआईएस पोर्टल पर क्रियेटर एवं डीडीओ लॉगिन का दुरुपयोग कर डमी और फर्जी वेंडर निर्मित किए गए। उनके माध्यम से बिजली विभाग के नाम पर गलत भुगतान निजी बैंक खातों में कराया गया।
इस तरह से किया जाता था फर्जीवाड़ा
जांच में यह भी पाया गया कि बिजली बिलों के भुगतान में दोहरा भुगतान किया गया। एक बार तो वास्तविक बिजली विभाग के खाते में भुगतान होता था और दूसरी बार फर्जी वेंडरों के माध्यम से निजी खातों में राशि स्थानांतरित की जाती थी। बैंक खातों की पुष्टि एवं बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि फर्जी वेंडर बिजली विभाग से संबंधित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के खाते हैं। इन खातों में प्राप्त राशि का लेन-देन आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर से यूपीआई के माध्यम से होना पाया गया।
आरोपी ऑपरेटर ने कबूला जुर्म
प्रशासनिक जांच में आरोपी छत्रपाल मर्सकोले ने अपने कथन में स्वयं के लाभ के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना स्वीकार किया है। गंभीर वित्तीय अनियमितता को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर को तत्काल कार्य से पृथक किया गया एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु सक्षम अधिकारियों को प्रतिवेदन भेजा गया।

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