Betul Swachhata Survey Ranking: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। स्वच्छता सर्वेक्षण में इस साल भी बैतूल नगर पालिका को बेहतर रैंकिंग मिलने की दूर-दूर तक संभावना नहीं है। इसकी वजह यह है कि सर्वेक्षण में जिन सिविल वर्क्स पर भी अंक मिलते हैं, उन कार्यों की स्थिति शहर में जीरो है। ऐसे में केवल साफ-सफाई के आधार पर बहुत ज्यादा अंक और बेहतर रैंकिंग मिलने की उम्मीद करना बेमानी होगा। आसार तो यह भी जताए जा रहे हैं कि पिछली बार जो रैंकिंग आई थी, वह भी इस बार शायद ही बरकरार रह पाए। 

स्वच्छता सर्वेक्षण का कार्य एक साल पीछे चल रहा है। वर्ष 2025 में जो सर्वेक्षण होना था, वह अभी तक नहीं हुआ है। अब कहीं इस सर्वेक्षण की गाइड लाइन आई है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह सर्वेक्षण हो जाए। सर्वेक्षण तो हो जाएगा, लेकिन बैतूल शहर की बहुत अच्छी स्थिति रहेगी, इसकी उम्मीद किसी को भी नहीं है। राज्य स्तर पर वर्ष 2023 में बैतूल की रैंकिंग 14 थी जो कि 2024 में भारी गिरावट के साथ 80 पर चली गई थी। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर 2023 में बैतूल की रैंकिंग 54 थी जो कि 2024 में 67 पर पहुंच गई थी। 

कई मापदंडों पर तय होती रैंकिंग 

स्वच्छता सर्वेक्षण में केवल साफ-सफाई ही नहीं देखी जाती है बल्कि और भी कई मापदंडों पर खरा उतरना होता है। शहर की साफ-सफाई के अलावा चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, उपयोग किए गए पानी का प्रबंधन, कचरे का प्रबंधन, स्वच्छता को लेकर लोगों की जागरूकता, नागरिकों का फीडबैक सहित अन्य कई कसौटियों पर खरा उतरने के बाद ही ज्यादा से ज्यादा अंक प्राप्त होते हैं। बैतूल में वैसे तो साफ-सफाई भी इतनी उम्दा नहीं है, जिसे 100 में से 100 अंक दिए जा सके। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाओं के तो और भी हाल-बेहाल हैं। 

नाले में नहीं पिचिंग, एसटीपी भी नहीं 

स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छे अंक के लिए शहर के सभी नाले पिचिंग वाले होने चाहिए होने चाहिए। इसके अलावा घरों और नाले से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी होना चाहिए। दूसरी ओर हाथी नाला सहित अन्य किसी भी नाले में पिचिंग नहीं है। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं है। इससे अंक कटेंगे। 

चौराहों-जलस्रोतों का सौंदर्यीकरण नहीं

शहर के चौराहे और जलस्रोतों का सौंदर्यीकरण और वहां लगे फव्वारे भी अंक दिलाते हैं। यहां फिलहाल एक भी चौराहे का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ है। हालांकि कार्य स्वीकृत है, लेकिन जब तक सर्वेक्षण होगा तब इन चौराहों पर काम चलता रहेगा। इससे यह सुंदर नजर आने के बजाय और बदहाल नजर आएंगे। इसके अलावा शहर के किसी भी जल स्रोत का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ है। कुछ स्थानों पर माचना नदी को छोड़ दिया जाए तो बाकी शहर के तीनों तालाब बदहाल स्थिति में हैं। न किसी का सौंदर्यीकरण हुआ है और न ही फव्वारे लगे हैं। 

सार्वजनिक शौचालयों के भी बुरे हाल 

इसी तरह शहर के सार्वजनिक शौचालयों के भी बुरे हाल हैं। शहर में 6 सार्वजनिक शौचालय हैं। यह सभी 20 से 30 साल पहले बने थे। इससे इन सभी को मरम्मत की दरकार है, लेकिन किसी की भी मरम्मत नहीं की गई है। इसके बावजूद अधिकारियों का इस ओर जरा भी ध्यान नहीं है। इसका खामियाजा कम रैंकिंग के रूप में पूरे शहर को भुगतना होगा। 

कदम-कदम पर गड्ढे, धूल का गुबार 

स्वच्छता सर्वेक्षण में ज्यादा अंक पाने के लिए यह भी जरुरी है कि हर वार्ड में नालियां ढंकी हुई हो, प्रत्येक वार्ड में सड़कें ऐसी हो जिनमें न गड्ढे हो और न धूल हो इसके अलावा बाजारों एवं मुख्य मार्गों पर लाइटिंग व्यवस्था व फुटपाथों पर हरियाली होना भी जरुरी है। इधर शहर में शायद ही कोई नाली कवर्ड है और सड़कों की बदहाली तो जगजाहिर है। फुटपाथों पर हरियाली दूर-दूर तक नजर नहीं आती। 

कम रैंकिंग से प्रभावित होगी ग्रांट 

जिस शहर की स्वच्छता रैंकिंग में जितनी बेहतर रैंकिंग होती है, उस शहर को सरकार की ओर से उतना अधिक अनुदान (ग्रांट) मिलता है, जिससे शहर में ज्यादा से ज्यादा काम कराए जा सकते हैं। इसका लाभ आम लोगों को मिलता है। दूसरी ओर शहर में जो हालात है, उन्हें देखते हुए अच्छी रैंकिंग आने की उम्मीद किसी को भी नहीं है। शहर में मौजूद खामियों के कारण थोक में अंक कटेंगे और शहर की रैंकिंग और भी खिसकने के पूरे आसार अभी से दिख रहे हैं। 

किस गतिविधि पर कितने अंक तय 

इस बार जो गाइड लाइन आई है उसके अनुसार विजिबल क्लीननेस पर 1500, सेग्रीगेशन, कलेक्शन एंड ट्रांसपोर्टेशन ऑफ वेस्ट पर 1000, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर 1500, एक्सेस ऑफ सैनिटेशन पर 1000, यूज्ड वाटर मैनेजमेंट पर 1000, मैकेनाइजेशन ऑफ डिस्लजिंग सर्विसेस पर 500, एडवोकेसी फॉर स्वच्छता पर 1500, इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग एंड इंस्टीट्यूशनल पैरामीटर्स पर 1000, ओवरआल वेलफेयर ऑफ सेनीटेशन वर्कर्स पर 500 और सिटीजन फीडबैक पर 1000 अंक तय है। इस तरह इन सभी गतिविधियों पर कुल 10500 अंक तय हैं।