Betul Mandi Mismanagement: एसडीएम के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां, 26 घंटे बाद भी नोटिस नहीं बने, डंपिंग पाइंट बना मंडी परिसर
Betul Mandi Mismanagement: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। कृषि उपज मंडी परिसर में मंडी सचिव तो स्वयं अपनी ओर से कभी व्यापारियों पर कार्रवाई नहीं करते है। कलेक्टर के निर्देश पर जब मंडी के भारसाधक अधिकारी एवं बैतूल एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने स्वयं पहुंचकर मंडी के चौकड़े नहीं हटाने वाली व्यापारिक फर्मों पर जुर्माना फ्रेम तो किया लेकिन २६ घंटे बीत जाने के बाद मंगलवार शाम ६ बजे तक भी मंडी प्रबंधन ने व्यापारियों को नेाटिस तक जारी नहीं किए थे। इतना ही नहीं किस फर्म पर कितना जुर्माना लगाया जाना है, इसकी तक जानकारी नहीं दी गई। जबकि मंडी प्रबंधन द्वारा बोरे नहीं उठाने वाली फर्मों के खिलाफ मंगलवार को भी जुर्माना लगाया जाना था, लेकिन जब एसडीएम द्वारा फ्रेमअप किए गए जुर्माना वसूली करने में ही मंडी प्रबंधन की रूचि नहीं है तो अपनी तरफ से नया जुर्मान लगाने की बात करना बेमानी होगी। मंडी प्रबंधन जुर्माना लगाने की बात करना बेमानी होगा। मंडी प्रबंधन एसडीएम द्वारा लगाया गया जुर्माना ही वसूल कर ले (जिसकी संभावना नगण्य है) तो बड़ी बात होगी।
कार्रवाई को बीते २६ घंटे
कृषि उपज मंडी बैतूल में मंडी शेड के साथ ही पूरे परिसर में पिछले लगभग एक माह से व्यापारियों के बोरों के चौकड़े कम होने का नाम नहीं ले रहे है बावजूद इसके मंडी सचिव द्वारा दस रूपए प्रति बोरा प्रतिदिन जुर्माना का प्रावधान होने के बावजूद कभी जुर्माना नहीं लगाया गया। सोमवार शाम लगभग ४ बजे कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी के निर्देश पर मंडी के भारसाधक अधिकारी डॉ. अभिजीत सिंह मंडी पहुंचे और कई दिनों से जमे व्यापारियों के चौकड़े के खिलाफ सामने रहकर जुर्माना की कार्रवाई करवाई। एसडीएम द्वारा १२ व्यापारियों के ११ हजार ६६० बोरों पर ५ लाख ८३ हजार रूपए जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई को लगभग २६ घंटे बीत चुके है।
इन १२ फर्मों पर लगाया था जुर्माना
एसडीएम द्वारा मंडी में मक्का की खरीदी करने वाली १२ फर्मों पर जुर्माना लगाया गया है। इन फर्मों में मे. मोहनलाल भीकूलाल, आरके ट्रेडर्स, मुकेश ट्रेडिंग कंपनी, श्रीराम ट्रेडिंग कंपनी, श्री गणेश ट्रेडिंग कंपनी, जेएसआर, बालाजी ट्रेडर्स, शर्मा ब्रदर्स, मुकेश राठौर अंकुश ट्रेडिंग कंपनी और साहू ट्रेडिंग कंपनी पर जुर्माना लगाया है। लेकिन २६ घंटे बाद भी मंडी प्रबंधन द्वारा मंगलवार शाम ६ बजे तक नोटिस ही जारी नहीं किए गए।
किस फर्म पर कितना जुर्माना पता नहीं
कलेक्टर के निर्देश पर मंडी के भारसाधक अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई को मंडी सचिव कितनी गंभीरता से ले रहे है यह इसी से पता चलता है कि कार्रवाई के २६ घंटे बीत जाने के बाद भी किस फर्म पर कितना जुर्माना लगाया गया है यह पत नहीं था। मंडी सचिव सुरेश कुमार परते ने मंगलवार शाम ६ बताया कि अभी नोटिस बनाने की कार्रवाई चल रही है। व्यापारियों को नोटिस देने के बाद उन्हें तत्काल जुर्माना राशि जमा करने के निर्देश दिए जाएगे। किस व्यापारी से कितना जुर्माना लेना है इसकी सूची अभी बनाई जा रही है।
मंडी में और बढ़ गई बोरों की संख्या
एसडीएम द्वारा सोमवार को ११ हजार ६६० बोरों पर जुर्माना लगाया गया था। मंगलवार को मंडी में १८ हजार ४२४ बोरे मक्का की आवक हुई है। वैसे यदि पुराने पूरे बोरे उठवा लिए जाए तो मंडी में मंगलवार खरीदे गए १८ हजार ४२४ बोरे ही रहना चाहिये इन्हें भी बुधवार सुबह तक उठ जाना चाहिये, लेकिन मंगलवार शाम में मंडी में ३० हजार से अधिक बोरे रखे हुए थे। नियमानुसार मंडी सचिव को मंगलवार को भी उन बोरों पर जुर्माना लगाना था लेकिन सोमवार लगाए गए जुर्माना के ही नोटिस जारी नहीं हुए है तो मंगलवार को जुर्माना लगाने की बात करना ही बेमानी है।
मंडी में ही मक्का डंप करते है व्यापारी
कृषि उपज मंडी में मक्का खरीदी करने वाले अधिकतर व्यापारी दिल्ली सहित अन्य स्थानों की फर्मों के लिए मक्का की खरीदी करते है। अधिकतर मक्का मालगाड़ी के माध्यम से भिजवाते है वहीं कुछ मात्रा में ही ट्रक और ट्रालों में भरकर सड़क मार्ग से भेजी जाती है। सूत्रों के अनुसार व्यापारी मंडी में मक्का खरीदकर मंडी प्रबंधन से मिलीभगत कर मंडी परिसर में ही मक्का डंप कर देते है। जब मक्का ले जाने रैक लगती है तो मंडी से मक्का भरकर सीधे रैक पाइंट पर पहुंचा देते है।
मंडी के प्रावधानों के अनुसार व्यापारी को मंडी में उपज खरीदी करने के बाद २४ से ४८ घंटे में अपने बोरे उठवाना है। व्यापारी मक्का के बोरे उठाकर अपने गाडाउन पर ले जाए और रैक लगने पर गोडाउन से रैक पाईंट पर पहुंचाए। इसमें व्यापारी को हम्माली और ट्रक किराया में लगभग ३५ से ४० रूपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त खर्च आता है। यही खर्च बचाने अधिकतर व्यापारी मंडी परिसर में मक्का की खरीदी कर मंडी परिसर में ही मक्का डंप कर देते है जिससे मंडी परिसर व्यापारियों के बोरों से भर जाता है। इससे मंडी आने वाले किसान परेशान होते रहते है। मंडी प्रबंधन व्यापारियों का हित देखते हुए किसानों को परेशान करने जब चाहे तब मक्का की खरीदी बंद कर देते है।
मक्का की रैक लगने पर व्यापारी सीधे मंडी से रैक पाईंट पर मक्का पहुंचा देते है। विश्वस्त सूत्रों की माने तो अधिकतर व्यापारी जिस फर्म के लिए खरीदी करते है उनसे बाकायदा पूरा खर्च भी लेते है, लेकिन मंडी में मक्का के बोरे डंप कर एक बार की हम्माली और ट्रक भाड़ा बचा लेते है। इसी के चलते मंडी परिसर से मक्का के बोरे कम ही नहीं होते है। यदि कलेक्टर और मंडी भारसाधक अधिकारी कड़ी कार्रवाई करे तो मंडी से व्यापारियों का बोलबाला कम होकर किसानों को राहत मिल सकती है।

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