Rural Drinking Water Crisis: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले के ग्रामीण अंचलों में एक बार फिर पानी के लिए समय-समय पर हाहाकार मचने की स्थिति बनना अब शुरू हो जाएगा। इसकी वजह यह है कि नल-जल योजना के बिजली कनेक्शनों के बिल भुगतान की व्यवस्था बदल दी गई है। इन बिलों का भुगतान अब भोपाल से नहीं होकर सीधे पंचायतों को ही करना होगा। वहीं पंचायतों का वित्तीय प्रबंधन कैसा रहता है, यह किसी को बताने की जरुरत नहीं है। यही वजह है कि आए दिन नल-जल योजना के कनेक्शन कटते रहेंगे और लोग पानी के लिए परेशान होते रहेंगे। 

ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के लिए लिए जाने वाले बिजली कनेक्शनों का भुगतान पहले पंचायतों को ही करना होता था। उस दौरान शायद ही कोई पंचायत ऐसी थी जिसका नल-जल योजना के बिजली कनेक्शन का नियमित बिल अदा होता था और वहां का कनेक्शन काटने का कभी नौबत नहीं आई हो। अधिकांश पंचायतों में हाल यह थे कि कई-कई महीनों तक बिजली बिल अदा नहीं होता था। ऐसे में बिजली कंपनी मजबूरन कनेक्शन विच्छेद कर देती थी। उसके बाद भी महीनों तक बिल अदा नहीं होता था और लोग पानी के लिए परेशान होते रहते थे। 

कांग्रेस सरकार बनने पर बदली व्यवस्था 

इसे देखते हुए कांग्रेस सरकार बनने पर वर्ष 2018 में बिल भुगतान की व्यवस्था बदल दी गई थी। उस समय से सीधे राज्य स्तर से भोपाल से ही सभी पंचायतों के नल-जल योजना के बिजली कनेक्शन के बिलों का भुगतान हो रहा था। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भोपाल द्वारा हर साल 2 बार में बिजली बिल का भुगतान कर दिया जाता था। इस व्यवस्था में नियमित तौर पर भुगतान हो रहा था और शायद ही किसी पंचायत का कनेक्शन बिल भुगतान नहीं होने के कारण काटने की नौबत आई थी। इससे लोगों को सुचारू रूप से पानी मिल रहा था और कोई परेशानी नहीं हुई। 

फिर से बदल गया भुगतान का सिस्टम 

अब इसी दिसंबर माह में बिजली कंपनी और ग्राम पंचायतों को भी शासन का पत्र आ गया है कि नल-जल योजना के बिजली बिलों का भुगतान पूर्ववत ग्राम पंचायतों द्वारा ही किया जाएगा। शासन स्तर से आखरी बार मार्च महीने में बिजली बिल का भुगतान किया गया था। इसलिए मार्च माह के बाद से पूरे बिल का भुगतान ग्राम पंचायतों को ही करना है। ऐसे में पंचायतों का पूरा बजट ही गड़बड़ाना तय है। जिन पंचायतों में यह सोच होगी कि ग्रामीणों को परेशानी न उठाना पड़े, वहां अन्य मदों की राशि से बिल भुगतान कर दिया जाएगा। वहीं जिनकी सोच ऐसी नहीं होगी, वहां बिजली बिल भुगतान को ज्यादा तवज्जो शायद ही मिले। 

पंचायतों पर इतनी राशि है अभी बकाया

जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 1777 कनेक्शन नल-जल योजनाओं के हैं। इन पर कुल 15 करोड़, 39 हजार रुपये की राशि बाकी है। इनमें उत्तर संभाग में 856 कनेक्शनों पर 4 करोड़ 29 लाख 38 हजार रुपये, दक्षिण संभाग में 550 कनेक्शनों पर 5 करोड़ 21 लाख 92 हजार रुपये और मुलताई संभाग में 371 कनेक्शनों पर 5 करोड़ 49 लाख 9 हजार रुपये की राशि बाकी है। 

ग्रामीणों में चिंता, कब तक मिलेगा पानी

नई व्यवस्था की जानकारी जैसे ही ग्रामीणों को मिल रही है, वैसे ही उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। उन्हें अब यही डर सता रहा है कि पता नहीं नल-जल योजना के जरिए उन्हें कब तक पानी मिलता रहेगा और कब कनेक्शन कट जाने से उन्हें पानी के लिए परेशान होना पड़ेगा। दूसरी ओर पंचायत पदाधिकारियों की चिंता भी बढ़ गई है। उनकी समस्या यह है कि एक ओर जहां नल-जल योजना के जल शुल्क की वसूली नहीं हो पाती है। ऐसे में उन्हें अन्य योजनाओं की राशि का उपयोग बिजली बिल भुगतान में करना होगा। इससे विकास कार्यों पर असर पड़ेगा। 

यह बोले बिजली कंपनी के महाप्रबंधक 

मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड बैतूल के महाप्रबंधक बीएस बघेल का कहना है कि इस संबंध में अभी तक ग्राम पंचायतों की नल-जल योजनाओं के बिजली कनेक्शन का भुगतान शासन स्तर से होता था। दिसंबर महीने से व्यवस्था बदल दी गई है। अब इसका भुगतान पंचायतों को ही करना होगा। नगरीय निकायों की व्यवस्था पूर्ववत है।