Betul mandi chaos: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। किसानों के नाम पर राजनीति कर अपनी रोटी सेंकने वाले किसान संगठन कृषि उपज मंडी में हो रही किसानों की फजीहत पर मूकदर्शक बने बैठे हैं। चाहे सत्तारूढ़ भाजपा के किसान मोर्चा के नेता हो या विपक्षी पार्टी कांग्रेस के किसान कांग्रेस के नेता हो, किसानों की फजीहत पर कोई भी सामने नहीं आ रहा है। यह दोनों तो राजनैतिक पार्टी के संगठन है, लेकिन सिर्फ किसानों के लिए किसानों द्वारा बनाया गया भारतीय किसान संघ भी मंडी में किसानों की दुर्दशा पर आवाज नहीं उठा रहा है। ऐसे में किसान स्वयं को अकेला और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मजबूरी में किसान उपज लेकर मंडी आने से कतरा रहे हंै और गांव में ही बिचौलियों को औने-पौने दाम में उपज बेचने को मजबूर हैं। 

मंडी में किसानों की नहीं व्यापारियों की चलती है मर्जी 

कृषि उपज मंडी वैसे तो किसानों की सुविधा के लिए बनी है, ताकि किसान गांव में बिचौलियों को उपज बेचने की जगह मंडी में सही दाम पर उपज बेच सके। लेकिन, बैतूल कृषि उपज मंडी में किसानों की हो रही फजीहत और व्यापारियों की मनमर्जी चलने से जिले के किसान मंडी आने से कतराने लगे हैं। मंडी में मक्का की बंपर आवक होने से मंडी प्रबंधन आए दिन किसानों पर ही लगाम लगा रहा है। व्यापारियों द्वारा एक-एक माह तक उपज नहीं उठाने के बावजूद उनके ऊपर कार्रवाई करना छोड़ किसानों को परेशान करने जब चाहे तब मंडी में मक्का की नीलामी कैंसिल कर दी जाती है, फिर चाहे किसानों को कड़ाके की ठंड में एक दिन रूकना पड़े या दो दिन। इससे मंडी प्रबंधन को कोई लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं उपज की नपाई करवाने हम्मालों से मिन्नतें करना हो या उपज बेचने के बाद भुगतान प्राप्त करने व्यापारियों के चक्कर काटना हो, हर जगह किसानों को ही परेशान होना पड़ता है। 

कोई नहीं उठा रहा किसानों की आवाज 

किसानों के नाम से राजनीति करने वाले संगठन भी किसानों का साथ देने आगे नहीं आ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने किसानों के लिए अलग संगठन बनाया है। भाजपा में किसान मोर्चा और कांग्रेस में किसान कांग्रेस के नाम से अलग संगठन बनाए गए हैं, लेकिन लगता है कि यह संगठन सिर्फ किसानों के वोट हथियाते तक ही सीमित हैं। चुनाव में किसानों के वोट लेने के बाद न तो किसान मोर्चा के पदाधिकारी और न ही किसान कांग्रेस के नेता किसानों को मुसीबत के समय साथ देने आते हैं। मंडी में परेशान हो रहे किसानों की परेशानी सब मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं, लेकिन कोई भी इनका साथ देने आगे नहीं आ रहे हैं। 

भाकिसं भी रैली निकालने और जयंती मनाने तक सीमित 

किसानों की लड़ाई लड़ने और किसानों को उनका अधिकार दिलाने के नाम पर भारतीय किसान संघ बनाया गया है ताकि किसानों पर होने वाले अत्याचार पर आवाज उठा सके। जिले में भी भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी बनाए गए हैं, लेकिन लगता है भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी भी मुसीबत के समय किसानों का साथ देने की बजाय सिर्फ रैली निकालने और जयंती मनाने तक ही सीमित हैं। मंडी में परेशान हो रहे किसानों की समस्या की ओर उनका कोई ध्यान ही नहीं है। 

बिचौलियों को उपज बेचने मजबूर हैं किसान 

कृषि उपज मंडी में किसानों की फजीहत देखकर अधिकतर किसानों ने मंडी आने से ही तौबा कर ली है। ज्यादातर किसान गांव में ही बिचौलियों को औने-पौने दामों में उपज बेच रहे हैं ताकि मंडी आकर परेशान होने से बच सके। जो किसान मंडी आ भी रहे हैं तो वे भी यहां मिल रहे अनुभव के बाद या तो जिले के बाहर की मंडियों का रूख करने या फिर बिचौलियों को उपज बेचने का मन बना रहे हैं।