Betul Mandi News: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। चुनाव के समय लगभग सभी राजनैतिक पार्टी किसानों के हित का दावा कर किसानों का साथ देकर उनके वोट हथिया लेती है, लेकिन चुनाव के बाद सत्ता में काबिज होने वाले दल के साथ ही विपक्ष भी किसानों की समस्या दूर करने उनके साथ खड़ा दिखाई नहीं देता है। दोनों ही प्रमुख राजनैतिक पार्टी भाजपा और कांग्रेस ने संगठन में किसान मोर्चा भी बनाया है, लेकिन जन किसान परेशान होता है तो न किसान मोर्चा, किसान संगठन साथ देने आते है और न ही सत्तापक्ष या विपक्ष के नेता किसानों के साथ खड़े नजर आते है। 

इसका स्पष्ट नजारा कृषि उपज मंडी में स्पष्ट देखा जा सकता है। यहां मंडी परिसर व्यापारियों के बोरों से पट गया है। जिसके चलते शुक्रवार को मक्का बेचने आए लगभग एक सैकड़ा किसानों के ट्रेक्टर मंडी परिसर में ही प्रवेश नहीं कर पाए। अब शनिवार और रविवार को मंडी में अनाज की नीलामी नहीं होने से किसानों को सोमवार तक इंतजार करना पड़ेगा। सोमवार भी उनके ट्रेक्टर अंदर जा पाए या नहीं क्योंकि यह तय नहीं हैं क्योंकि व्यापारियों के आगे नतमस्तक हो चुका मंडी प्रबंधन के साथ ही प्रशासन भी शायद ही व्यापारियों के बोरे मंडी से उठवा पाएं।

मंडी में रखे व्यापारियों के एक लाख बोरे

मंडी अधिनियम में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि मंडी में खरीदी करने वाले व्यापारी अगले कार्यदिवस या २४ घंटे में मंडी परिसर में खरीदी गई उपज के बोरे न हटाए तो मंडी प्रबंधन उनसे प्रति बोरा प्रतिदिन दस रूपए जुर्माना वसूल करेगा, लेकिन बैतूल कृषि उपज मंडी में पिछले लगभग एक माह से अधिक समय से मंडी शेड के साथ ही मंडी परिसर से व्यापारियों के बोरे कम होने के बदले बढ़ते ही जा रहे है। 

वर्तमान में मंडी परिसर में व्यापारियों के लगभग एक लाख बोरों की छल्ली लगी हुई है। व्यापारियों के आगे नतमस्तक नजर आ रहा मंडी प्रबंधन और ना ही जिला प्रशासन व्यापारियों के बोरे हटवा पा रहे हे, और ना ही उनपर जुर्माना लगा रहे है। मुंडी प्रबंधन यदि मंडी अधिनियम के अनुसार व्यापारियों से जुर्माना वसूल करता तो इस सीजन में ही जुर्माने की राशि एक करोड़ रूपए पर कर जाती लेकिन नतमस्तक मंडी प्रबंधन व्यापारियों से जुर्माना नहीं ले रहा है जिससे व्यापारियों के हौसले बुलंद है और किसान परेशान हो रहे है।

खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के बावजूद मंडी में नहीं पहुंच पाए वाहन

गुरूवार को क्रिसमस का अवकाश रहने के बावजूद मंडी से व्यापारियों के बोरे नहीं उठ पाए। मंडी में मक्का लेकर आने वाले वाहनों को प्रवेश देने का समय सुबह ५ से १० बजे है। मंडी में जगह नहीं मिलने के चलते सैकड़ों किसान ट्रेक्टर में मक्का भरकर गुरूवार को ही मंडी आ गए मंडी गेट से आठनेर राड पर लगभग दो किलोमीटर तक ट्रेक्टरों की कतार लगी हुई थी। ७ डिग्री सेल्सियस तापमान में कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान यह सोचकर खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे थे ताकि शुक्रवार सुबह उनके वाहन को मंडी में प्रवेश मिल जाए।

एक सैकड़ा से अधिक ट्रेक्टरों को नहीं मिला प्रवेश

कृषि उपज मंडी परिसर में व्यापारियों को बोरे रखे होने से शुक्रवार को मंडी परिसर में मक्का के वाहन ही नहीं पहुंच पा रहे थे। किसानों को वाहन अंदर ले जाने काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही थी। इसके बावजूद किसानों के मक्का भरे लगभग एक सैकड़ा से अधिक ट्रेक्टर ट्राली मंडी परिसर में प्रवेश ही नहीं कर पा। जैसे-तैसे जितने वाहन अंदर पहुंचे उनमें से कुछ ढेर ही लग पाए बाकी किसानों ने वाहन से ही अपनी मक्का बेची। 

दो दिन करना पड़ेगा इंतजार

शुक्रवार को जिन किसानों के मका भरे वाहन मंडी में प्रवेश नहीं कर पाए उन्हें अब दो दिन तक इंतजार करना पड़ेगा। आज महीने का चौथा शनिवार होने से बैंक बंद रहेगें। बैंक बंद होने के दिन व्यापारी मंडी में अनाज नहीं खरीदते है। इसलिए मंडी में आज नीलामी नहीं होगी। रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहने से मंडी बंद रहेगी। ऐसे में अब मंडी में अनाज की नीलामी दो दिन बाद सोमवार को ही होगी। किसानों को या तो अपने वाहन वापस ले जाना होगा या दो दिन मंडी परिसर के बाहर इंतजार करना होगा। किसानों की इस मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी मंडी के बाहर ही औने-पौने दामों में मक्का खरीद रहे है। जिससे किसानों को दोहरा नुकसान हो रहा है इसके बावजूद न तो सत्ता पक्ष, ना विपक्ष और ना ही किसान संगठन के नेता किसानों का साथ देने आगे आ रहे हैं।