Betul Police News: कबाड़खाने बन कर रह गए पुलिस थाने, सालों से लगा है वाहनों का अंबार
बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul Police News)। विभिन्न अपराधों, दुर्घटनाओं और अन्य कई कारणों से पुलिस द्वारा वाहनों की जब्ती की जाती है। यह बात अलग है कि इन वाहनों की कई सालों तक नीलामी नहीं हो पाती है। यही कारण है कि यह वाहन लंबे समय तक थाना परिसरों में ही पड़े-पड़े सड़ते रहते हैं। यह वाहन जहां किसी काम के नहीं रह जाते, वहीं दूसरी ओर पुलिस के किसी मुसीबत से कम नहीं होते।
विभिन्न अपराधों में आरोपियों के साथ ही इन अपराधों को अंजाम देते समय इस्तेमाल किए गए वाहनों को भी जब्त किया जाता है। इसके अलावा दुर्घटनाएं होने पर भी वाहनों को जब्त करना होता है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद तो उन्हें कोर्ट में पेश किया जाता है जहां से या तो जेल भिजवा दिया जाता है या फिर जमानत हो जाती है। लेकिन जब्त किए गए वाहन पुलिस की जिम्मेदारी बन जाते हैं। इसलिए पुलिस इन वाहनों को थाना परिसर में ही अपनी देखरेख में रख लेती है।
निर्णय होने तक रखना होता है सुरक्षित
इन वाहनों को कोर्ट में संबंधित प्रकरण का निराकरण होने तक सुरक्षित रखना होता है। प्रकरणों का निराकरण होने में सालों लग जाते हैं, इसलिए पुलिस इन वाहनों की नीलामी आदि भी नहीं कर सकती है। दूसरी ओर कुछ वाहन निर्णय होते तक इस कदर खस्ताहाल हो जाते हैं कि वे किसी काम के ही नहीं रहते हैं। इसलिए वाहन स्वामी भी उन्हें नहीं ले जाते हैं और वे थाने में ही पड़े रहते हैं। चोरी के कई वाहन भी पकड़ाने के बाद भी सूचना नहीं मिलने या दस्तावेज आदि के अभाव में थाने में ही पड़े रहते हैं।

जिले में 4 सालों में इतने वाहन जब्त
यदि बैतूल जिले में जब्त किए गए वाहनों की स्थिति देखें तो यहां 1 जनवरी 2021 से 25 दिसंबर 2025 तक विभिन्न थाना पुलिसों द्वारा 4687 वाहन जब्त किए गए हैं। मध्यप्रदेश पुलिस के सिटीजन पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस दौरान आमला पुलिस ने 318, आठनेर पुलिस ने 193, महिला थाना बैतूल ने 1, बैतूल बाजार पुलिस ने 318, भैंसदेही पुलिस ने 279, बीजादेही पुलिस ने 72, बोरदेही पुलिस ने 246, चिचोली पुलिस ने 332, चोपना पुलिस ने 53, बैतूल गंज पुलिस ने 203, झल्लार पुलिस ने 31, कोतवाली पुलिस बैतूल ने 799, मोहदा पुलिस ने 93, मुलताई पुलिस ने 814, रानीपुर पुलिस ने 160, साईखेड़ा पुलिस ने 96, सारणी पुलिस ने 154 और शाहपुर पुलिस ने 530 वाहन जब्त किए हैं। इनमें से जो वाहन छोड़ने योग्य रहते हैं उन्हें आवश्यक कार्रवाई के बाद छोड़ दिया जाता है, वहीं जिनके प्रकरण विचाराधीन रहते हैं वे थाने में ही रखे रहते हैं।
कोविड के पहले हुई थी नीलामी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिन वाहनों के प्रकरणों का निराकरण हो जाता है, उन्हें नीलाम करने का प्रावधान है, लेकिन ऐसे वाहनों की नीलामी भी समय पर नहीं हो पाती है। बताते हैं कि इससे पहले कोविड काल के पहले कुछ थानों के वाहनों की नीलामी हुई थी। इसमें भी सभी वाहन नीलाम नहीं हो सके थे।
शहर के दोनों थानों में लग गया अंबार
बैतूल शहर के दोनों थानों में भी जब्त वाहनों का अंबार लगा हुआ है। यहां बड़े वाहनों से लेकर मोटर साइकिलें तक बड़ी संख्या में परिसर में खड़ी हैं। अधिकांश वाहन केवल कबाड़ ही नहीं हुए बल्कि सड़-गल तक चुके हैं। वाहनों के अंबार के कारण एक ओर भारी गंदगी फैल रही है वहीं दूसरी ओर यह स्थिति भी बन गई है कि विभाग के और पुलिसकर्मियों के वाहन खड़े करने तक को जगह नहीं बची है। इससे स्टाफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस तरह होती है नीलामी की प्रक्रिया
विभागीय सूत्रों के अनुसार न्यायालय की अनुमति लेने के बाद एसडीएम के माध्यम से नीलामी की जाती है। अब कुछ थानों ने जब्त वाहनों की नीलामी के लिए प्रक्रिया शुरू की है। कोतवाली थाना बैतूल में भी यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कोतवाली थाना प्रभारी नीरज पाल ने बताया कि जब्त वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया एसडीएम के माध्यम से होती है। कोतवाली थाना परिसर में मौजूद 129 वाहनों की नीलामी का प्रस्ताव हमने भिजवा दिया है।

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