बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Cyber Fraud Betul)। जिला मुख्यालय के समीप ग्राम खेड़ी सांवलीगढ़ के बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुए लगभग 9.84 करोड़ की सायबर ठगी मामले में भले ही पुलिस अभी तक बैंक प्रबंधक तक नहीं पहुंच पाई है, लेकिन इस मामले में अभी तक गिरफ्तार हुए नौ आरोपियों में से एक आरोपी को जमानत भी मिल गई है। इस आरोपी को 11 दिन पहले ही पुलिस ने इंदौर से गिरफ्तार किया था, जिसे 22 दिसम्बर को प्रथम अतिरिक्त द्वितीय सत्र न्यायालय से सशर्त जमानत मिल गई है। आरोपी को आसानी से जमानत मिलने पर पुलिस द्वारा बनाए गए प्रकरण पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोपी की ओर से पैरवी अधिवक्ता रजनीश जैन ने की है।

ज्ञातव्य हो कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा खेड़ी सांवलीगढ़ के एक ग्रामीण द्वारा उसके जनधन बैंक खाते से 2 करोड़ रूपए के लेनदेन की शिकायत की गई थी। इस शिकायत की जांच में पुलिस ने लगभग 9.84 करोड़ रूपए की सायबर ठगी का खुलासा किया था। पुलिस ने इस मामले में 20 नवम्बर को बैंक ऑफ महाराष्ट्र खेड़ी सांवलीगढ़ में कार्यरत राजा उर्फ आयूष चौहान सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 7 दिसम्बर को एक आरोपी, 11 दिसम्बर को दो आरोपी और 15 दिसम्बर को 3 आरोपियों सहित कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 

पुलिस ने 15 दिसम्बर को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ऑनलाईन बेटिंग एवं गैमिंग की राशि का खुलासा करने का दावा किया था। हालांकि पुलिस अभी तक बैंक ऑफ महाराष्ट्र खेड़ी सांवलीगढ़ के शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने प्रेस वार्त्ता में इस प्रकरण की स्टेट लेवल से जांच करवाने के प्रयास करने की बात कही थी ताकि बड़े स्तर पर कार्रवाई संभव हो सके। पुलिस ने बड़े गैंगस्टर्स तक भी पहुंचने की योजना बनाई थी, लेकिन केस ऐसा बनाया कि इस बड़े मामले के एक आरोपी को गिरफ्तारी के 11 दिन बाद ही जमानत मिल गई है।

बृजेश महाजन को मिली जमानत

9.84 करोड़ के सायबर ठगी मामले में पुलिस ने 11 दिसम्बर को खरगौन निवासी बृजेश महाजन पिता बसंत महाजन को गिरफ्तार किया था। इस पूरे प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाना में बीएनएस की धारा 318, 3(5), 338, 386(3), 340(2) और सूचना एवं प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66सी, 66डी के तहत अपराध दर्ज किया था।

पत्नी ने दिया था आवेदन

इस मामले में 11 दिसम्बर को गिरफ्तार किए गए आरोपी बृजेश महाजन की पत्नी प्रिया महाजन ने अपने अधिवक्ता रजनीश जैन के माध्यम से अतिरिक्त द्वितीय सत्र न्यायालय बैतूल में संहिता 2023 की धारा 488 के अंतर्गत प्रथम नियमित जमानत याचिका दायर की थी। विद्वान न्यायाधीश द्वारा जमानत याचिका पर दोनों पक्षों के तर्क सुने गए। जिसमें आरोपी बृजेश महाजन को सहायक आरोपी बताते हुए तर्क दिया कि बृजेश महाजन ने साल 2022 के बाद आरोपी अमित अग्रवाल से किसी प्रकार का लेन देन नहीं हुआ है। 

2022 के पूर्व जो लेन-देन हुआ वह भी व्यक्तिगत हाथ उधारी के रूप में किए गए थे। शंका के आधार पर उसे आरोपी बनाया गया है। विद्वाना न्यायाधीश सचिन कुमार घोष ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद आरोपी बृजेश महाजन को 50-50 हजार रूपए की दो सक्षम जमानतें एवं एक लाख रूपए के व्यक्तिगत बंधपत्र पर सशर्त जमानत दे दी है। आरोपी की ओर से पैरवी अधिवक्ता रजनीश जैन ने की। मात्र 11 दिन में इस बड़े मामले में आरोपी को जमानत मिलने पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हंै। एक आरोपी को जमानत मिलने के बाद अन्य आरोपियों की जमानत मिलने की संभावना बढ़ गई है।