Organized crime in Betul: बैतूल की बिगडैल कानून व्यवस्था से CMO और PHQ खफा, जल्द दिख सकता है नाराजगी का असर
मयूर भार्गव, बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Organized crime in Betul)। बीते एक माह में लगातार बद से बदत्तर हुई जिले की कानून व्यवस्था की खबरें मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) और पुलिस हेड क्वार्टर (पीएचक्यू) तक पहुंची हैं। लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था और आदिवासी-दलित समुदाय के साथ घट रहे गंभीर अपराधों से सीएमओ और पीएचक्यू खासा नाराज है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी एक सुर में बैतूल जिले की लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की है।
जिले में बढ़ा आर्गेंनाईज्ड क्राइम और गैंगवार
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय पर ही विगत एक सप्ताह में कई जघन्य और गंभीर अपराध घटित हुए हैं। जिले में संगठित अपराध और गैंगवार की कदमताल शुरू हो गई है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार सवालिया निशान लग रहे हैं। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। आर्गेनाईज्ड क्राइम और गैंगवार की तरफ जिले के हालात बढ़ चुके हैं। लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था को सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम पुलिस द्वारा उठाए जा रहे हो ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। सांप निकलने के बाद लकीर पीटने की तर्ज पर पुलिस काम कर रही है। आम जनता और पुलिस के बीच जबरदस्त संवादहीनता है। पुलिस का मुखबिर तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
जिले में अनकंट्रोल हो चुका क्राइम
चर्चा है कि मुखबिरी करने वालों ने सूचना देना इसलिए बंद कर दिया है क्योंकि उनकी सूचना गुप्त ना रहकर उनके नाम सहित अपराधियों तक पहुंचाई जा रही है जिससे आने वाले समय में मुखबिरों को अपरिहार्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे साफ समझा जा सकता है कि जिले में पुलिस किस पैटर्न पर कार्य कर रही है। बैतूल जिला अब हाईप्रोफाइल पॉलीटिकल हो चुका है। एक केंद्रीय राज्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष इस जिले से ही प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बावजूद इसके जिले में क्राइम अनकंट्रोल हो चुका है।
जुलूस से स्थापित हो रहे क्रिमनल
अपराध घटित होने के बाद आरोपियों को पकडक़र उसका जुलूस निकालने की एक नई परंपरा इस जिले में पिछले कुछ समय से पुलिस अफसरों ने शुरू की है। मनोवैज्ञानिकों का इस मामले में साफ कहना है कि अपराधी का जुलूस निकालने से समाज पर उसका उल्टा असर हो रहा है। अपराधी के जुलूस के साथ दर्जन भर से अधिक पुलिस कर्मियों, अधिकारियों के चलने और सायरन बजाते हुए पुलिस वाहनों के साथ रहने से समाज पर अपराधी का भय और बढ़ रहा है। अपराधी को इससे कोई असर नहीं हो रहा है उल्टा उसकी एक प्रकार ब्रांडिंग हो रही है और जब वह छूट कर आता है तो दोगुनी धमक के साथ क्राइम को अंजाम देता है इसलिए अपराधी का जुलूस निकालने का पैटर्न रिवर्स इफेक्ट दे रहा है।
जल्द दिख सकता है महकमे में बदलाव
आवश्यकता है पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली सुधारने की और सालों से थानों में जमे जकड़े बैठे निचले स्टाफ को बदलने की। इसके बाद पुलिसिंग को सही तरीके से करना पड़ेगा तभी शांति का टापू कहलाने वाला यह जिला आर्गेनाईज्ड क्राइम और गैंगवार से बच पाएगा। अन्यथा एआई के इस दौर में सायबर फ्रॉड का तो शिकार आए दिन आम आदमी हो ही रहा है। बहरहाल मुख्य खबर यह है कि बिगड़ैल कानून व्यवस्था पर जताई गई जनप्रतिनिधियों की नाराजगी और मुख्यमंत्री सचिवालय सहित पीएचक्यू पहुंची तथ्यात्मक खबरों के बाद जिले के पुलिस महकमे में आने वाले समय में बड़े बदलाव की आवाज दबे पांव सुनाई दे रही है।

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