बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul law and order)। इन दिनों जिले में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस का खुफिया तंत्र ध्वस्त नजर आ रहा है। पहले इन जिले में जो अपराध होते थे वह क्षणिक आवेश का परिणाम होते थे। लेकिन अब जिले में संगठित अपराध और गैंगवार हो रहे हैं। आए दिन चाकूबाजी, अपहरण, मारपीट सहित अन्य गंभीर अपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। कानून व्यवस्था आऊट ऑफ कंट्रोल नजर आ रही है। 

अपराध रोकने की दिशा में कोई ठोस पहल जिला पुलिस की तरफ दिखाई नहीं दे रही है। जिले के जनप्रतिनिधियों को जिले में लगातार अपराध बढऩे को लेकर कोई चिंता है ऐसा दिखता नहीं है। बड़े से बड़े अपराध घट रहे हैं और बाद में पुलिस अपराधियों को पकडक़र अपनी पीठ थपथपा लेती है। जिला अब ऑर्गेनाइज्ड क्राईम (संगठित अपराध) और गैंगवार की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। जिला मुख्यालय पर पिछले एक सप्ताह में जो अपराध हुए हैं उनसे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्राइम के मामले में बैतूल किस दिशा में जा रहा है? 

अपराधियों में पुलिस का भय बिल्कुल भी नहीं दिखाई नहीं दे रहा है। पुलिस का खुफिया तंत्र (मुखबिर) तो मानो पाताल लोक चला गया है। शांति का टापू कहलाने वाले इस जिले के पॉवरफुल जनप्रतिनिधियों जिसमें केंद्रीय राज्य मंत्री डीडी उइके और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल शामिल हैं उन्हें शांति के इस टापू की चिंता करने और इस दिशा में कड़े कदम उठाकर साफ संदेश देने की जरूरत है। 

यहां हम किसी भी पर्टिकुलर क्राइम को लेकर बात नहीं करेंगे लेकिन बुधवार को जिला मुख्यालय पर बीच शहर में वह भी शहर के सबसे पॉश इलाके में हुए क्राइम का जिक्र करना जरूरी है। बुधवार को जिले के सबसे बड़े महाविद्यालय जेएच कालेज के पास सागौन बाबा दरबार से भरी दोपहर में एक नाबालिग किशोर को 8-10 लोग उठाकर चुन्नीढाना क्षेत्र में ले जाते हैं और मरते दम तक उसके रॉड, फावड़ा, लाठी से पीटते हैं। गंभीर रूप से घायल  किशोर की आईसीयू में उपचार के दौरान गुरुवार सुबह मौत हो जाती है। 

पुलिस के लिए जरूर यह तर्क काम करेगा कि मृतक नाबालिग भी अपराधिक प्रवृत्ति का था। लेकिन यहां चिंता का विषय यह है कि जिन्होंने इस नाबालिग को मारा है उसमें से एक एनएसए का आरोपी है और फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर है। आरोपियों और मृतक किशोर के बीच पुराना विवाद भी चलने की बात सामने आई है। जब बीच शहर में, जिला मुख्यालय पर कानून व्यवस्था की यह हालत है तो पूरे जिले में क्या चल रहा होगा? इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। 

जिले के शांति प्रिय नागरिकों ने अपने चुने हुए जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि शांति के टापू की ख्याति प्राप्त इस जिले में शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए जो भी आवश्यक हो वो करें, अन्यथा बिगड़ैल कानून व्यवस्था के खिलाफ बैतूल बंद जैसे उपाय सामने आ सकते हैं।