Betul school closed: बैतूल जिले में बंद हो सकते हैं 145 स्कूल, शिक्षा मंत्री ने विस में किया था ऐलान
बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul school closed)। बेहद कम बच्चे अध्ययनरत होने से जिले के 145 स्कूलों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इन स्कूलों में केवल 1 से 10 बच्चे ही दर्ज होने से यह स्थिति बनने के आसार नजर आ रहे हैं। हालांकि पिछले साल जिले से 16 ऐसे स्कूलों को बंद करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भिजवाया गया था, पर सरकार ने आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) का हवाला देते हुए इन्हें बंद करने से इंकार कर दिया था। लेकिन, विधानसभा के शीतलकालीन सत्र में शिक्षा मंत्री के इस बारे में नए ऐलान से यह अटकलें फिर जोर पकड़ रही हैं।
गौरतलब है कि सोमवार को ही सार्वजनिक हुई यूडाइस पोर्टल की रिपोर्ट में बैतूल जिले में ऐसे स्कूलों की संख्या 156 बताई गई है, जिनमें 1 से लेकर 10 बच्चे ही दर्ज हैं। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अनुसार पोर्टल पर वेरिफिकेशन का कार्य अभी पूरा नहीं होने से यह संख्या 156 दिखाई जा रही है। वास्तव में जिले में ऐसे स्कूलों की संख्या 145 ही हैं। इन स्कूलों में 2 से लेकर 10 तक बच्चे दर्ज हैं। इन सभी 145 स्कूलों में कुल 1001 बच्चे अध्ययनरत हैं। जिले में कक्षा 1 से लेकर 12 तक कुल 2900 स्कूल हैं। इनमें सरकारी के अलावा निजी स्कूल भी शामिल हैं।
कम बच्चों को लेकर शासन का रूख
शासन की मंशा है कि जिन भी स्कूलों में बेहद कम संख्या में बच्चे दर्ज है, उन स्कूलों को 1 किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। इन बच्चों को उन स्कूलों में भिजवाने के साथ ही शिक्षकों को भी उसी स्कूल में पदस्थ कर दिया जाएगा। इसी कारण हर साल प्रदेश भर में उन स्कूलों की सूची बनती है, जहां पर 10 या 20 से कम बच्चे हैं।
ऐसे 16 स्कूल थे जिले में पिछले साल
पहले तो नहीं, लेकिन पिछले साल जिले में ऐसे 16 स्कूल थे, जिनमें 20 या उनसे कम बच्चे थे। इन स्कूलों को बंद करने का प्रस्ताव जिला स्तर से शासन को भिजवाया गया था, लेकिन इसकी मंजूरी नहीं मिली। इसका कारण यह बताया गया कि वर्तमान में आरटीई लागू है। इसके तहत एक किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक शिक्षा पाना हर बच्चे का अधिकार है। यदि इन स्कूलों को बंद कर दिया जाता है तो उनके अधिकारों का हनन होगा। इसलिए इन स्कूलों को बंद नहीं किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री ने विस में कही यह बात
इधर प्रदेश के शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कहा था कि विद्यार्थी विहीन और 10 से कम प्रवेश वाले स्कूलों को बंद किया जाएगा। इन्हीं कारणों से इन अटकलों का बाजार एक बार फिर गर्म हो गया है कि कहीं इन स्कूलों को बंद न कर दिया जाए।
स्कूल बंद होने से यह लाभ भी होंगे
यदि यह 141 स्कूल बंद होते हैं तो एक ओर फिर बच्चों को पढ़ने के लिए एक किलोमीटर दूर जाना होगा। लेकिन, इससे कुछ लाभ भी होंगे। शिक्षकों को भी वहां पदस्थ करने से उन स्कूलों में इनकी संख्या बढ़ जाएगी, जिससे पढ़ाई अच्छी होगी। इसके अलावा अधिक बच्चों के होने से वहां सुविधाएं भी ज्यादा उपलब्ध होंगी।
यूडाइस की रिपोर्ट में यह हुआ खुलासा
यूडाइस की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि सत्र 2025-26 में जिले के स्कूलों में पिछले साल से कम बच्चों का नामांकन हुआ है। सत्र 2024-25 में 286579 बच्चों का नामांकन हुआ था। वहीं चालू सत्र 2025-26 में 282655 बच्चों का नामांकन ही हो पाया है। इस तरह 3902 नामांकन कम हो पाए हैं। ड्रॉपबॉक्स में पहुंचने वाले बच्चों की संख्या 16898 है। अकेले सरकारी स्कूलों में 5566 नामांकन कम हुए हैं।
पिछले सत्र में सरकारी स्कूलों में 190385 नामांकन हुए थे। वहीं इस साल 184879 बच्चों के नामांकन ही हुए हैं। सरकारी स्कूलों में ड्रॉपबॉक्स में जाने वाले बच्चों की संख्या 13149 हैं। दूसरी ओर निजी स्कूलों में नामांकन बढ़े हैं। पिछले साल निजी स्कूलों में 96194 बच्चों के नामांकन हुए थे। वहीं इस साल इनकी संख्या 97776 हो गई है। यहां बीते साल के मुकाबले 1582 नामांकन अधिक हुए हैं। निजी स्कूलों में ड्रॉपबॉक्स में जाने वाले बच्चों की संख्या भी कम 3749 है।
अभी नहीं आया ऐसा कोई आदेश
इस संबंध में शिक्षा विभाग के योजना अधिकारी सुबोध शर्मा कहते हैं कि पिछले साल 16 स्कूलों का प्रस्ताव शासन को जिले से गया था, लेकिन आरटीई का हवाला देकर इन्हें बंद नहीं किया गया था। इस साल अभी तक ऐसा कोई आदेश नहीं आया है, जिसमें इन स्कूलों को बंद करने का कहा गया हो।

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