Betul Cyber Fraud: साइबर ठगी मामले में 3 और आरोपी धराए, बैतूल पुलिस की बड़ी सफलता
बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul Cyber Fraud)। साइबर ठगी मामले में बैतूल पुलिस शानदार जांच और कार्रवाई कर रही है। बैंक खातों के जरिए अवैध लेन-देन की शिकायत से शुरू हुई यह जांच तार से तार जुड़ते हुए अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क तक पहुंच गई है। यही नहीं इस नेटवर्क के कर्ताधर्ता भी अब एक-एक कर दबोचे जा रहे हैं। एक और सफलता हासिल करते हुए पुलिस ने इस मामले में 3 और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही अब इस मामले में कुल 9 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
एसपी वीरेंद्र जैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि साइबर ठगी और अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क मामले में आरोपी अश्विन धर्मवाल और प्रवीण जयसवाल को खंडवा से और पीयूष राठौड़ को बैतूल से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि बैतूल जिले के 7 म्यूल खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन फर्जी फर्मों के माध्यम से किया गया। अश्विन धर्मवाल द्वारा जानबूझकर 'अश्विन एग्रो' (खिरकिया, जिला हरदा) नामक फर्जी फर्म पंजीकृत कराई गई तथा उसका चालू खाता अवैध ऑनलाइन बेटिंग एवं साइबर ठगी के लेन-देन के लिए अन्य आरोपियों को सौंप दिया गया। जिससे लगभग 2 करोड़ 70 लाख की राशि म्यूल खातों में पहुंची। अश्विन एग्रो फर्म के खाते से 10 करोड़ 12 लाख की अवैध राशि का ट्रांजैक्शन पाया गया। अवैध ऑनलाइन बेटिंग एवं गेमिंग से प्राप्त राशि पहले फर्जी फर्मों के चालू खातों में भेजी जाती थी। वहां से म्यूल खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर की जाती थी।
प्रवीण जयसवाल खुलवाता था खाते
आरोपी प्रवीण जयसवाल अकाउंट खुलवाने व उपलब्ध कराने की मुख्य कड़ी था। अश्विन एग्रो फर्म खुलवाने में इसकी विशेष भूमिका रही। फर्म या कंपनी के करंट अकाउंट खुलवाने हेतु फर्जी दुकानों व प्रतिष्ठानों का दिखावा किया जाता था। इन दुकानों में नकली सामग्री, खाली बोतलें, डमी स्टॉक एवं फर्जी साइन बोर्ड रखे जाते थे, ताकि बैंक निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान वास्तविक प्रतीत हो और बैंक अधिकारियों द्वारा चालू खाता खोल दिया जाए। प्रवीण द्वारा खरगोन, खंडवा, हरदा, इंदौर एवं जलगांव (महाराष्ट्र) में लगभग 50 लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए। जिनमें से करीब 20 चालू खाते हैं। चालू खातों की किट अन्य सहयोगी आरोपियों को अवैध लेन-देन हेतु सौंप दी जाती थी।
सिम कार्ड उपलब्ध करवाता था पीयूष राठौड़
तीसरे आरोपी पीयूष राठौड़ द्वारा अवैध रूप से सिम कार्ड उपलब्ध कराए जाते थे। वह ग्राहकों को भ्रमित कर दो बार बायोमेट्रिक प्रक्रिया कराता था- एक सिम ग्राहक को देकर दूसरी सिम अपने पास रख लेता था, जिसे बाद में अपराधियों को बेच दिया जाता था। पीयूष द्वारा राजा को 2 सिम 5000 में बेची गई।
26500 रुपये में करंट और 10 हजार में सेविंग एकाउंट
आरोपी को सेविंग अकाउंट उपलब्ध कराने पर 10000 प्रति खाता और चालू (करंट) अकाउंट उपलब्ध कराने पर 26500 प्रति खाता दिए जाते थे। करंट अकाउंट में डेबिट फ्रीज की सुविधा नहीं होने एवं उच्च ट्रांजैक्शन सीमा उपलब्ध होने के कारण करोड़ों रुपये के निरंतर ट्रांजैक्शन इन्हीं खातों के माध्यम से किए जाते थे। आरोपियों से एक-एक मोबाइल फोन जप्त किया गया है, जिनमें अवैध लेन-देन, संपर्क सूत्र एवं डिजिटल साक्ष्य पाए गए हैं।
अब तक इतने लेन-देन का खुलासा
गौरतलब है कि इस प्रकरण में 9.84 करोड़ से अधिक के अवैध ऑनलाइन लेन-देन का खुलासा पहले ही हो चुका था। जबकि एक म्यूल खाते में सात माह के भीतर 10 करोड़ से अधिक का ट्रांजैक्शन पाया गया है। इस मामले में 20 नवंबर को राजा उर्फ आयुष चौहान, अंकित राजपूत और नरेंद्र सिंह राजपूत, 7 दिसंबर कोि अमित अग्रवाल को इंदौर से, 11 दिसंबर राजेन्द्र राजपूत और ब्रजेश महाजन को गिरफ्तार किया गया था। अब कुल 9 आरोपी इस प्रकरण में गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
स्टेट लेवल से जांच कराने का प्रयास
एसपी श्री जैन ने बताया कि इस प्रकरण में स्टेट लेवल से जांच कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे बड़े स्तर पर कार्रवाई संभव हो सकेगी। हालांकि यहां भी इस मामले की जांच के लिए बहुत बड़ी टीम बनाई गई है और पैमाने पर कार्रवाई भी हुई है। अभी भी हम बड़े-बड़े गैंगस्टर्स तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
कार्रवाई में इनकी रही मुख्य भूमिका
यह पूरी कार्रवाई एसपी वीरेंद्र जैन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी के निर्देशन में गठित साइबर सेल एवं विशेष एसआईटी टीम द्वारा की गई विवेचना का परिणाम है। इसमें डीएसपी दुर्गेश आर्मो, निरीक्षक नीरज पाल, एसआई अश्विनी चौधरी (साइबर), नवीन सोनकर (साइबर), उत्तम मस्तकार, राकेश सारेयाम, रवि शाक्य, हेड कांस्टेबल तरुण पटेल, शिव उइके, कांस्टेबल दीपेन्द्र सिंह (साइबर), राजेंद्र धाड़से (साइबर), बलराम राजपूत (साइबर), पंकज (साइबर) एवं सचिन हनवते (साइबर) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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