जिले की लचर कानून व्यवस्था पर कुछ तो एक्शन लीजिए माननीय

  • 1. किराना व्यापारी को बेहोश होते तक मारा। 

  • 2. फर्शी विवाद में होस पाइप से बेरहमी से पीटा। 

  • 3. जानी ढाबा के पास चाकू चले, 2 घायल, 1 गंभीर। 

  • 4. पाढर में ढाबा संचालक और उसकी पत्नी को पीटा। 

मयूर भार्गव, बैतूल (Betul Crime:)। बीते कुछ दिनों में हुए उपरोक्त चारों मामले इस बात की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त हैं कि शांति का टापू कहलाने वाले बैतूल जिले को जिले की लचर कानून व्यवस्था निगल रही है। जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में क्राइम आऊट ऑफ कंट्रोल हो गया है। इस जिले का मानो अब भगवान ही मालिक है। हालांकि इस जिले में पॉलिटिकल पॉवर के मामले में अब कोई कमी नहीं है। केंद्रीय राज्यमंत्री, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित चारों विधायक भाजपा के हैं। 

केंद्रीय राज्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रुतबे को लिखकर रूल आऊट करना बिल्कुल आवश्यक नहीं है। लेकिन हाईप्रोफाइल पॉलिटिकल इंफ्लूएंस होने के बावजूद कानून व्यवस्था आऊट ऑफ कंट्रोल हो गई है। अपराधियों में पुलिस का खौफ नाममात्र का भी नहीं बचा है। सांप निकलने के बाद लकीर पीटने की बुनियाद जिले की पुलिस बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर रही है। शांति के टापू इस जिले में अब संगठित अपराध भी होने लगे हैं। कानून व्यवस्था को लेकर किसी भी जनप्रतिनिधि की तरफ से कोई प्रतिक्रिया और चिंता दिखाई नहीं देती है। जिसके चलते पुलिस के हौसले बुलंद है और मनमानी चल रही है। 

चार घटनाएं बयां कर रही कानून की स्थिति

बैतूल जिला इन दिनों लगातार बढ़ते अपराधों के ग्राफ के कारण लाइम लाइट में है। पूरे जिले में चल रही अवैध गतिविधियों और अपराधिक घटनाओं की बात नहीं भी करें तो जिला मुख्यालय पर आए दिन दिनदहाड़े खुलेआम हो रहे अपराधों ने नागरिकों को चिंता में डाल दिया है। बीते 48 घंटों में जिला मुख्यालय पर चार प्रमुख घटनाएं जो सामने आई हैं उनसे साफ संदेश जा रहा है कि लचर कानून व्यवस्था के कारण क्राइम आऊट ऑफ कंट्रोल हो गया है।  

  • पहली घटना में पान की दुकान पर खड़े एक किराना व्यवसायी को चार-पांच बदमाशों ने बेरहमी से बेहोश होने तक बेस बॉल के बैट से पीटा। 
  • अगले दिन दूसरी घटना में बडोरा में एक ढाबे के सामने हुई चाकूबाजी की घटना में दो युवक घायल हुए और एक गंभीर को भेापाल रेफर किया गया है। 
  • तीसरी घटना में समीपस्थ ग्राम पाढर में एक ढाबा संचालक और उसकी पत्नी को खाना खाने आए बदमाशों ने बिल को लेकर बहस की और फिर ढाबा संचालक, उसकी पत्नी, साला और एक पूर्व सरपंच को रॉड और जलती लकड़ी से मारा। इस घटना के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने के विरोध में शनिवार को पाढर चौकी के सामने आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोगों ने तीन घंटे तक चक्काजाम भी किया था। खबर लिखे जाने तक इस घटना के आरोपी फरार थे। ढाबे के सामने हुई चाकूबाजी की घटना के आरोपी भी फरार है। पान की दुकान पर खड़े किराना व्यवसायी से मारपीट के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 
  • चौथी घटना सबसे रोचक है। इस घटना में एक युवक से नाली की फर्शी टूट गयी थी। युवक से फर्शी की मरम्मत कराने के नाम पर बतौर जमानत दो युवकों ने 5 हजार रुपए वसूल कर लिए। पीडि़त द्वारा फर्शी की मरम्मत कराने के बाद जब जमानत के तौर पर दिए गए रुपए मांगे गए तो उसके साथ उन दोनों युवकों ने होस पाइप से उसकी बेरहमी से पिटाई कर डाली। पीडि़त ने इसकी शिकायत भी कोतवाली में दर्ज कराई है। पीटने वाले दोनों आरोपी फरार चल रहे हैं। मामला शहर के सदर क्षेत्र का है। युवक के साथ बेरहमी से पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

गंभीर और ईमानदार प्रयास की आवश्यकता

कानून व्यवस्था की बदहाली के लिए जिले में खुलेआम चल रहा नशे का व्यापार काफी हद तक जिम्मेदार है। दिक्कत यह है कि नशे और अवैध हथियारों के व्यापार की पूरी जानकारी पुलिस के पास होने के बावजूद यदा-कदा कार्यवाही की जाती है। ऐसा बमुश्किल ही कोई ढाबा होगा जहां अवैध शराब नहीं बिक रही है। आबकारी अमला और पुलिस विभाग दोनों का ऐसे अवैध धंधे करने वालों को कथित तौर पर अभयदान है। 

पुलिस की भूमिका सांप निकलने के बाद लकीर पीटने की है। क्योंकि अब जिले में संगठित अपराध होने लगे हैं इसलिए पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा। बार-बार सिर्फ थाना प्रभारियों में बदलाव करने से कुछ नहीं होगा। 8-8, 10-10 साल से थानों में जमे निचले स्टाफ में भी बदलाव की जरूरत है। बहरहाल हाईप्रोफाइल पॉलिटिकल जोन में आ चुके इस जिले के जनप्रतिनिधियों से भी आम जनता की अपेक्षा है कि वे जिले की लगातार लचर हो रही कानून व्यवस्था को टाईट करने के लिए गंभीर और ईमानदार प्रयास करें।