Bhavantar Payment Scam in Betul: बैतूल में भावांतर भुगतान योजना में मिली बड़ी गड़बड़ी, कलेक्टर ने 4 पर दर्ज करवाई एफआईआर
बैतूल (Bhavantar Payment Scam in Betul)। ज्वार के बाद अब सोयाबीन के लिए भावांतर भुगतान योजना में फर्जी पंजीयन का मामला जिले में सामने आया है। कलेक्टर द्वारा की गई समीक्षा में ऐसे 4 प्रकरण सामने आए हैं। इस पर गड़बड़ी में शामिल चार व्यक्तियों पर आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
गुरुवार को कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने योजना में पंजीयन सत्यापन की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। समीक्षा में पाया गया कि प्राथमिक सहकारी समिति भैंसदेही और चिल्कापुर में बिना सिकमी (बटाई/ठेका) के पंजीयन कराया गया है।
दो समितियों में पाई गई गड़बड़ी
जिले की 56 समितियों की समीक्षा के दौरान दो समितियों में गड़बड़ी पाई गई। कलेक्टर ने तत्काल एसडीएम भैंसदेही और तहसीलदार भीमपुर को जांच सौंपकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि ग्राम बांटलाकलां (भैंसदेही) निवासी कृतिका धाड़से, रहियटदादु (चिचोली) निवासी भावेश धाड़से और मीनाक्षी धाड़से ने बिना सिकमी पंजीयन कराया था। वहीं ग्राम जामझीरी (भैंसदेही) निवासी सहादेव मकोड़े द्वारा योजना शुरू होने से पहले नियमविरुद्ध पंजीयन कराया गया।
किसान बोले- नहीं दिया किसी को ठेका
वास्तविक भूमि स्वामियों ने स्पष्ट बताया कि वे स्वयं अपनी भूमि पर खेती कर रहे हैं और किसी को ठेका या बटाई पर भूमि नहीं दी है। इससे यह प्रमाणित हुआ कि योजना का लाभ गैरकानूनी ढंग से लेने की मंशा से पंजीयन कराया गया था।
इतनी सोयाबीन का कर चुके थे विक्रय
फर्जी तरीके से पंजीयन कराने वाले यह लोग 170 क्विंटल सोयाबीन बेच चुके थे। यह सोयाबीन 7.70 लाख रुपये में बेचा गया था। इस पर भावांतर की राशि करीब 1.70 लाख रुपये मिलती।
भुगतान पर लगाई गई रोक
कलेक्टर की सजगता और तत्परता से शासन को आर्थिक नुकसान होने से बचा लिया गया। उन्होंने न केवल चारों व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल पुलिस अधीक्षक से चर्चा कर एफआईआर करवाई बल्कि चारों के भुगतान पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने पंजीयन सत्यापन में लापरवाही पाए जाने पर तहसीलदार भीमपुर और तहसीलदार भैंसदेही को नोटिस जारी कर जवाब-तलब भी किया हैं।
ज्वार में करोड़ों का नुकसान बच गया
पूर्व में भी ज्वार खरीदी में कलेक्टर श्री सूर्यवंशी की माइक्रो मॉनिटरिंग से शासन 26 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित आर्थिक नुकसान से बच गया। समर्थन मूल्य पर ज्वार खरीदी के दौरान जिले में अनुचित लाभ लेने की मंशा से लगभग 1043 अवैध पंजीयन कराए गए थे, जिन्हें समय रहते असत्यापित कर दिया गया। कलेक्टर की सतर्कता और निरंतर निगरानी के कारण ये अवैध पंजीयन खरीदी प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाए और शासन को भारी आर्थिक हानि होने से टल गई।

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