बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul Cyber Crime News)। समीपस्थ ग्राम खेड़ी सांवलीगढ़ की बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा के अंतर्गत हुए लगभग 9 करोड़ 84 लाख के सायबर ठगी के मामले में मय दस्तावेज के डीजीपी मध्यप्रदेश को शिकायत भेजकर मुख्य आरोपी और बैंक प्रबंधक को अभयदान देने की शिकायत पहुंच चुकी है। अब शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में बैंक प्रबंधन की शिकायत बैंकिंग लोकपाल को भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। 

उल्लेखनीय है कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र की खेड़ी सांवलीगढ़ शाखा से बैतूल कोतवाली पुलिस ने 9.84 करोड़ की सायबर ठगी की पुष्टि करते हुए एक अदने से बैंक कर्मचारी (अस्थायी) और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले में यह भी चर्चा है कि पुलिस सायबर ठगी के इस बड़े मामले में बैंक मैनेजर और इंदौर के रहने वाले किसी मुख्य आरोपी को बचा रही है। 

जनादेश की खबर से मचा हड़कंप 

सायबर ठगी के मुख्य आरोपी और बैंक प्रबंधक को अभयदान क्यों? शीर्षक से 5 दिसम्बर को राष्ट्रीय जनादेश में प्रकाशित खबर से हड$कम्प मचा हुआ है। महाराष्ट्र बैंक खेड़ी के प्रबंधक सहित अन्य की कार्यप्रणाली से वाकिफ कुछ लोग इस मामले में राष्ट्रीय जनादेश को जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। 

जेडीएम स्तर के अफसर लौटे गुपचुप 

प्राप्त जानकारी के अनुसार सायबर ठगी का खुलासा होने के बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जेडीएम स्तर के किसी अधिकारी के खेड़ी सांवलीगढ़ पहुंचने और फिर गुपचुप तरीके से वापस जाने की चर्चा भी है। 

मैनेजर के करीब ने लगवाई नौकरी 

सूत्रों ने बताया कि जिस राजा राजपूत को पुलिस ने सायबर ठगी के मामले में आरोपी बनाया है उसे बैंक मैनेजर के एक करीब व्यक्ति ने ही अस्थायी तौर पर बैंक में नौकरी पर लगाया था। राजा राजपूत बैंक में डेलीवेजेस पर कार्य करता था। सायबर ठगी के इस 9.84 करोड़ के मामले में खेड़ी शाखा के बैंक मित्रों की भी जांच कराने की मांग की गई है। 

हर हफ्ते होती थी दारू-मुर्गा पार्टी 

क्षेत्र में चर्चा है कि सायबर फ्रॉड में लिफ्त लोगों की हर हफ्ते दारू-मुर्गा पार्टी भी होती थी। यदि बैंक मित्रों से सख्त पूछताछ हो तो इस मामले में और भी आरोपी सामने आ सकते हैं।

वरिष्ठ अफसरों के मार्गदर्शन में जांच 

सायबर ठगी का यह बड़ा मामला बैतूल कोतवाली पुलिस, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में इंवेस्टिगेट कर रही है। लेकिन जब पुलिस की जांच पर ऊंगलियां उठने लगी हैं तो क्षेत्र के लोगों ने बैंकिंग लोकपाल को इस पूरे मामले की शिकायत भेजी है। अब देखना यह है कि डीजीपी स्तर से पुलिस को क्या निर्देश मिलते हैं? और बैंकिंग लोकपाल इस मामले में क्या कदम उठाता है?