Blind Women Cricket Team India: दिव्यांग क्रिकेटर बेटियों से सरकार का सौतेला रवैया, क्रांति गौड को 1 करोड़, इन्हें चव्वनी भी नहीं
कृष्णकांत आर्य, बैतूल (Blind Women Cricket Team India)। दिव्यांग किसी से कम नहीं है। दिव्यांगों को भी बराबर का हक मिलना चाहिए। दिव्यांग अपने आपको से कम नहीं आंके ऐसे उद्बोधन मंच से कई बार देते हुए उनकी हौसला अफजाई की जाती है। लेकिन जब उनका हक दिलाने की बात आती है तो आम लोग और संस्थाएं तो दूर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री तक उनके साथ सौतेला व्यवहार करने से नहीं चूकते हैं।
इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हाल ही में हुए महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप और दृष्टिहीन महिला टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में दिखाई दिया। महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल प्रदेश की खिलाड़ी क्रांति गौड को एक करोड़ रुपए पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। हाल ही में भारतीय दृष्टिीन महिला क्रिकेट टीम ने भी टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में बैतूल की दुर्गा येवले के साथ ही मध्यप्रदेश की तीन दृष्टिबाधित महिला खिलाड़ी शामिल थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन तीनों बेटियों को वर्ल्ड कप जीतने के 12 दिन बाद भी पुरस्कार देना तो दूर सम्मान तक करने की जहमत नहीं उठाई है। प्रदेश सरकार के इस सौतेले रवैये से पहला वर्ल्ड कप जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली दिव्यांग बेटियां खुद के साथ हुए भेदभाव को महसूस कर रही हैं।
इन देशों को हराकर रही अपराजेय
अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिहीन महिला क्रिकेट में पहली बार विश्व आयोजित हुआ था। टी-20 फार्मेट में खेले गए पहले विश्वकप की मेजबानी भारत और श्रीलंका ने की थी। 11 से 23 नवम्बर तक हुए इस विश्वकप में भारतीय दृष्टिबाधित महिला टीम ने अपराजेय रहते हुए अपने सभी मुकाबले एकतरफा अंदाज में जीतकर पहला वल्र्ड कप अपने नाम किया।
भारतीय इंडियन ब्लाइंड वूमेन क्रिकेट टीम ने पहला मैच श्रीलंका से मात्र 3 ओवर की बैटिंग कर जीत लिया था। दूसरा मैच आस्ट्रेलिया से 235 रन से, तीसरा मैच पाकिस्तान से जीतकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। सेमीफाइनल में आस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। 23 नवम्बर को फाइनल में नेपाल को एक तरफा मुकाबले में हराकर पहला वल्र्ड कप जीतकर देश का नाम रोशन किया।
प्रधानमंत्री ने किया सम्मानित
इसके कुछ दिन पूर्व ही भारत की बेटियों ने महिला वन डे क्रिकेट वर्ल्ड जीता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व विजेता टीम को अपने घर बुलाकर सम्मानित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना भेदभाव किए दृष्टिबाधित महिला टी-20 वल्र्ड कप जीतने वाली बेटियों को भी उसी तरह अपने आवास पर बुलाकर सम्मानित किया जिससे दृष्टिहीन बेटियों का जोश दोगुना हो गया था।
मुख्यमंत्री कर रहे सौतेला व्यवहार
महिला वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में मध्यप्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी क्रांति गोड शामिल थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक समारोह में क्रांति गौड को एक करोड़ रुपए नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। इतना ही अन्य प्रदेश में भी उनके प्रदेश की महिला खिलाडिय़ों को नगद राशि देकर सम्मानित किया था। दृष्टिहीन महिला टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में म.प्र. की तीन खिलाड़ी दुर्गा येवले, सुषमा पटेल और सुषमा सारथ शामिल थी।
इसके साथ ही 16 सदस्यीय भारतीय टीम में ओडिसा की 4, कर्नाटक की 3, दिल्ली की 2, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार की एक-एक दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ी शामिल थी। अन्य प्रदेश की तो जानकारी नहीं है, लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वकप जीतने के 12 दिन बाद तक भी प्रदेश की तीनों बेटियों के सम्मान या पुरस्कार देने की कोई घोषणा नहीं की है। इस सौतेले व्यवहार से देश का नाम रोशन करने वाली प्रदेश की बेटियां स्वयं को ठगा सा महसूस कर रही है।

स्वच्छता के सारथियों के स्वास्थ्य और सम्मान को समर्पित “स्वच्छता स्वाभिमान कार्यशाला”
आगामी मई -जून माह में संभावित स्थानीय निकायो के आम/उप चुनाव के दृष्टिगत मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज
धोवाताल की 60 महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की मिसाल
सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री देवड़ा
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार पर जोर, राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अहम निर्देश