बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul Cyber Fraud Case)। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम खेड़ी सांवलीगढ़ के निवासी एक मजदूर के जनधन खाते में अचानक 2 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ था जिसकी गहन जांच-पड़ताल के बाद कोतवाली पुलिस ने सायबर ठगी के मामले का पर्दाफाश 20 नवम्बर को किया था। इस मामले में एसपी वीरेंद्र जैन ने बकायदा एक पत्रकारवार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी थी। जिसमें 9.84 करोड़ की ठगी की पुष्टि की गई थी। वहीं बैंक ऑफ महाराष्ट्र खेड़ी सांवलीगढ़ शाखा के बैंक कर्मी सहित 3 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। तीनों आरोपी फिलहाल जेल में है। इस सायबर ठगी के मामले में यह आंकड़ा 30 करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई गई थी। पूरे मामले में खेड़ी सांवलीगढ़ महाराष्ट्र बैंक शाखा के प्रबंधक की संदिग्ध भूमिका होने के बावजूद उसे पूरे मामले में कहीं पर भी इंवाल्व नहीं किया गया था। अब क्षेत्र में चर्चा है कि पुलिस इस सायबर ठगी के बड़े मामले में बैंक प्रबंधक और इंदौर के रहने वाले मुख्य आरोपी को बचा रही है। 

सायबर ठगी के इस मामले में शातिर गिरोह ने मृत व्यक्ति के खाते का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया था। मृत व्यक्ति के खाते का इस्तेमाल सहित अन्य ट्रांजैक्शन बगैर बैंक प्रबंधन की मिलीभगत के संभव नहीं है। लेकिन पुलिस ने बैंक के एक अदने से कर्मचारी को आरोपी बनाया है। इस मामले में जब खेड़ी निवासी मजदूरी करने वाले बिसराम इवने ने विगत दिवस कलेक्टर और एसपी बैतूल को इस संबंध में शिकायत की थी और बताया था कि उसके जनधन खाते में लगभग 2 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेन-देन दिख रहा है जिसकी उसे कोई जानकारी भी नहीं है। वह जब बैंक में केवायसी कराने गया तब उसे पता चला कि उसके खाते से जून 2025 से नवम्बर तक लगभग डेड़ करोड़ रुपए का अवैध ट्रांजैक्शन हो गया है। इसके अलावा बैंक के सात अलग-अलग लोगों के खातों से भी 9 करोड़ 84 लाख 95 हजार 212 रुपए की हेराफेरी हुई है। 

पुलिस ने अपनी जांच में बैंक ऑफ महाराष्ट्र खेड़ी सांवलीगढ़ में पासबुक में एंट्री करने वाले मात्र एक अस्थायी कर्मचारी राजा उर्फ आयुष चौहान को आरोपी बनाया था। इसके अलावा गिरोह का सरगना हरदा निवासी अंकित राजपूत और उसका साथी नरेंद्र सिंह राजपूत था। पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि अंकित राजपूत इंदौर के जिस मुख्य सरगना के लिए काम करता है उसे पुलिस बचा रही है। इतना ही नहीं अंकित राजपूत और नरेंद्र सिंह राजपूत को इंदौर निवासी सायबर ठगी के कथित सरगना ने पूरा मामला अपने ऊपर लेने के लिए अच्छा खासा उपकृत भी किया है ऐसी चर्चा है। 

पूरे मामले की शिकायत डीजीपी मध्यप्रदेश कैलाश मकवाणा को भेजकर किसी बाहर के ईमानदार पुलिस अधिकारी से कराने से मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का साफ कहना है कि करोड़ों की सायबर ठगी के इस मामले में बैंक शाखा खेड़ी सांवलीगढ़ के अदने से कर्मचारी को दो अन्य आरोपियों के साथ आरोपी बनाना न्याय संगत नहीं है। इस मामले में खेड़ी ब्रांच के शाखा प्रबंधक के पुराने रिकार्ड की भी जांच होनी चाहिए। सूत्रों ने बताया कि खेड़ी ब्रांच के शाखा प्रबंधक को इसके पहले भी पुलिस पूछताछ के लिए बुला चुकी है लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया है। अब देखना यह है कि उच्च स्तर पर बैठे अफसर इस मामले में संज्ञान लेते हैं या फिर सबकुछ ढाक के तीन पात की तरह चलता रहेगा?