Betul Pension Office: बंद होगा बैतूल का पेंशन कार्यालय, पेंशनरों की होगी फजीहत, काटने होंगे भोपाल के चक्कर
बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul Pension Office)। बैतूल सहित जिला मुख्यालयों पर संचालित प्रदेश भर के सभी पेंशन कार्यालय जल्द ही बंद होने वाले हैं। इसके बाद पेंशन संबंधी प्रकरणों का निराकरण राज्य केंद्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल द्वारा किया जाएगा। इससे पेंशन संबंधी विभिन्न कार्यों के लिए भोपाल के चक्कर काटने होंगे। इस संबंध में मध्यप्रदेश के वित्त विभाग के अवर सचिव द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है।
वर्तमान में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जिला पेंशन कार्यालय संचालित है। पेंशन कार्यालय में पेंशन संबंधी सभी कार्य होते हैं। जिस विभाग से कर्मचारी-अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं, उस विभाग के आहरण-वितरण अधिकारी उनके पेंशन प्रस्ताव पेंशन कार्यालय को भिजवाते हैं। यहां उसकी जांच-पड़ताल करके कुछ खामी पाए जानेपर आपत्ति लगाई जाती है। सब कुछ ठीक होने पर पीपीओ जारी कर दिया जाता है। समयमान वेतनमान आदि लगने पर और निर्धारित उम्र होने पर पेंशन का रिवीजन भी यहीं से होता है। कर्मचारी या पेंशनर को कभी किसी काम से आना भी पड़ा तो उन्हें बैतूल कार्यालय तक ही आना पड़ता है। इससे कम समय में ही उनका काम हो जाता है। अब यह सुविधा खत्म होने वाली है।
पेंशन प्रोसेसिंग सेल का हुआ गठन
दरअसल, वित्त विभाग ने जिला स्तर पर पेंशन प्रकरणों के निराकरण की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त कर संचालनालय पेंशन भविष्य निधि एवं बीमा मध्यप्रदेश भोपाल के अंतर्गत 'राज्य केंद्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेलÓ का गठन किया है। यह सेल भोपाल से पूरे राज्य का कार्य देखेगी। इस सेल को ही पेंशन प्रकरणों के निराकरण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकृत किया गया है।
जिले के पद पेंशन प्रकोष्ठ के तहत
नई व्यवस्था के तहत ही जिला स्तर पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को केंद्रीयकृत पेंशन सेल (प्रकोष्ठ) के तहत किया जा रहा है। अभी जिला स्तर पर जिला पेंशन अधिकारी, सहायक पेंशन अधिकारी, 2 निम्र श्रेणी लिपिक, 2 भृत्य और 1 सिक्योरिटी गार्ड पदस्थ है। नई व्यवस्था के तहत यह सभी पद यहां से समाप्त कर दिए जाएंगे।
दो साल तक रहेंगे पेंशन समाधान केंद्र
नई व्यवस्था के तहत जिला पेंशन कार्यालय को पेंशन समाधान केंद्र बना दिया जाएगा। इसके बाद यहां पर केवल एक सहायक पेंशन अधिकारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर और एक भृत्य भर पदस्थ रहेंगे। यह व्यवस्था केवल 2 साल के लिए रहेगी। इसके बाद यह केंद्र भी बंद किया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि समाधान केंद्र से भी अधिकांश मामलों में पेंशनरों को भोपाल की राह दिखा दी जाएगी।
बढ़ जाएगी पेंशनरों की समस्या
नई व्यवस्था में पेंशनरों की समस्याएं बढ़ना तय माना जा रहा है। अभी पेंशनरों की हर समस्या का समाधान जिला पेंशन कार्यालय में ही हो जाता है। इसके अलावा उन्हें और कहीं नहीं जाना होता है। नई व्यवस्था लागू होने पर उन्हें हर कार्य के लिए भोपाल चक्कर काटना होगा। इससे उनका अधिक समय तो लगेगा ही, साथ ही अधिक राशि भी खर्च करना होगा। गौरतलब है कि वर्तमान में जिले में लगभग 4000 पेंशनर हैं।
वर्ष 2011 से चल रही वर्तमान व्यवस्था
जिला पेंशन कार्यालय की वर्तमान व्यवस्था 1 जनवरी 2011 से चल रही है। इससे पहले पेंशन शाखा भी जिला कोषालय के अंतर्गत ही आती थी। वहां कार्य के भारी दबाव के चलते पेंशन शाखा का कार्यालय अलग ही शुरू किया गया था। हालांकि सबसे पहले पेंशन संबंधी कामकाज महालेखाकार कार्यालय ग्वालियर से होते थे। इसके बाद पेंशन संबंधी कार्यों के लिए संभागीय स्तर पर कार्यालय शुरू किए गए और फिर जिला स्तर पर भी कार्यालय शुरू किए गए। अब एक बार फिर पेंशन की व्यवस्था केंद्रीकृत होकर सीधे भोपाल से संचालित होगी।

बंगाल को लेकर कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा आरोप, गिरफ्तारी की जताई आशंका