बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Cleanliness Survey India)। शहरों में हर साल होने वाला स्वच्छता सर्वेक्षण लेटलतीफी के साथ चल रहा है। वर्ष 2025 अपने अंतिम पड़ाव में पहुंच चुका है, लेकिन इस साल के स्वच्छता सर्वेक्षण की अभी तक गाइड लाइन ही नहीं आ सकी है। इसके चलते इसकी तैयारियां भी शुरू नहीं हो पाई है। गाइड लाइन में दिए गए नियमों के आधार पर ही तैयारी शुरू होती है। 

गौरतलब है कि देश भर के नगरीय निकायों में हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण होता है। सर्वेक्षण में मिलने वाली रैकिंग के आधार पर ही निकायों को अतिरिक्त सुविधाएं और विकास कार्यों के लिए प्रोत्साहन राशि प्राप्त होती है। यही कारण है कि नगरीय निकाय इस सर्वेक्षण में बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करने की कवायद करते हैं। 

गाइड लाइन के आधार पर तैयारियां 

स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए तैयारियां हर साल तय होने वाली गाइड लाइन के आधार पर होती है। गाइड लाइन में ही तय किया जाता है कि कौन-कौन सी गतिविधियों के आधार पर सर्वेक्षण होगा और कितने-कितने अंक मिलेंगे। हर बार नंबरों के वितरण में बदलाव होता है। यही कारण है कि पूर्व की गाइड लाइन के आधार पर तैयारियां नहीं की जा सकती है। 

तैयारी के लिए चाहिए पर्याप्त समय 

सर्वेक्षण की तैयारी में पर्याप्त समय चाहिए क्योंकि इसमें कुछ सिविल वर्क भी होते हैं, जैसे पक्की ढंकी हुई नाली, वाटर बॉडी जैसे नदी-नाले का सौंदर्यीकरण, उनकी रिटर्निंगवाल निर्माण, वार्डों में लाइटिंग, चौक चौराहों का सौंदर्यीकरण, फव्वारे लगाना, पब्लिक टॉयलेट की मरम्मत आदि कार्य। कुल मिलाकर यह सर्वेक्षण केवल झाडू लगाने, नाली सफाई व कचरा उठाने तक ही सीमित नहीं है बल्कि शहर के संपूर्ण विकास का अवलोकन हो गया है। 

लंबे समय से चल रही लेटलतीफी

वैसे यह सर्वेक्षण करीब एक साल देरी से चल रहा है। वर्ष 2024 के सर्वेक्षण के लिए गाइड लाइन दिसंबर 2024 में आई थी और सर्वेक्षण फरवरी 2025 में हो गया था। इससे तैयारियों के लिए भी समय कम मिल सका था। हालांकि शुरूआती सालों में 31 मार्च तक और फिर 31 मई तक गाइड लाइन आ जाती थी और तैयारियों के लिए भी पर्याप्त समय मिलता था। अब गाइड लाइन का ही कोई ठिकाना नहीं रहता और तैयारियों को भी पर्याप्त समय नहीं मिलता।