Betul Education News: शिक्षा विभाग का कारनामा: बच्चे पढ़ रहे गांव में, नामांकन दिखा रहा सीएम राइज स्कूल में
बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (Betul Education News)। बैतूल में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां बच्चे तो एक ग्राम के स्कूल में पढ़ रहे हैं और शिक्षक भी वहीं पदस्थ हैं जबकि पोर्टल पर इन्हें कई किलोमीटर दूर स्थित सीएम राइज स्कूल में बताया जा रहा है। इससे जहां शिक्षकों का वेतन अटक जाएगा वहीं बच्चों का भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा। दूसरी ओर विभागीय अफसरों का रवैया यह है कि बार-बार आवेदन के बावजूद सुधार नहीं किया जा रहा है।
यह मामला जिला मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम बाजपुर का है। बाजपुर के एकीकृत माध्यमिक स्कूल के अतर्गत आने वाले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पहले 64 बच्चे अध्ययनरत थे। इसके बाद जब बैतूल बाजार में सीएम राइज स्कूल शुरू हुआ तो व्यवस्था यह बनाई गई कि आसपास के ग्रामों के स्कूलों को इसमें मर्ज कर वहां के शिक्षकों को भी यहीं पदस्थ कर दिया जाए और बच्चों को भी सीएम राइज स्कूल में ही पढ़ाया जाए। बच्चों को लाने और पहुंचाने के लिए बसें भी शुरू की गई। इसके बाद बाजपुर स्कूल के 30 बच्चों और पालकों ने सीएम राइज स्कूल बैतूल बाजार में जाने पर सहमति दे दी।
कई पालकों ने कर दिया इंकार
इधर बाजपुर ग्राम में कई पालकों ने अपने बच्चों को सीएम राइज बैतूल बाजार भिजवाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि उनके बच्चे बाजपुर में स्थित स्कूल में ही पढ़ेंगे। इससे हुआ यह कि बाजपुर के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में फिलहाल 34 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए प्राथमिक स्कूल में 2, माध्यमिक स्कूल में 2 और एक अतिथि शिक्षिका भी है।

नामांकन दिखा रहा बैतूल बाजार में
यह 34 बच्चे पढ़ तो बाजपुर में रहे हैं और शिक्षक भी वहीं पदस्थ हैं, लेकिन एजुकेशन पोर्टल पर इन्हें सीएम राइज बैतूल बाजार में दिखाया जा रहा है। जबकि ग्राम के सरपंच, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष व सदस्य तथा ग्रामीण बच्चों को बैतूल बाजार नहीं भिजवाना चाहते। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसीसी और संकुल प्राचार्य को कई बार आवेदन सौंप कर अवगत करा चुके हैं। इसके बावजूद सुधार नहीं किया जा रहा है।
बच्चों-शिक्षक दोनों को नुकसान
दूसरी जगह नामांकन दिखाए जाने से बच्चों और शिक्षकों, दोनों को ही नुकसान होगा। बच्चों के बैतूल बाजार में कक्षाएं अटैंड नहीं करने पर उन्हें वहां परीक्षा में नहीं बिठाया जाएगा, जबकि बाजपुर में उनकी परीक्षा होगी नहीं। इससे उनका भविष्य ही खतरे में पड़ जाएगा। दूसरी ओर शिक्षकों का वेतन भी नहीं निकलेगा। अभी तक तो भलमनसाहत में उनका वेतन जैसे-तैसे निकल रहा है, लेकिन अब अफसरे भी हाथ खड़े करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में ड्यूटी करने के बावजूद उन्हें वेतन के लाले पड़ जाएंगे।
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इन कारणों से मना कर रहे ग्रामीण
ग्रामीण अपने बच्चों को कई कारणों से बैतूल बाजार नहीं भेजना चाह रहे हैं। उनका कहना है कि एक तो उनके गांव तक स्कूल की बस नहीं आती है। दरअसल, बैतूल बाजार से मलकापुर रोड से उनका गांव डेढ़ किलोमीटर दूर है। यह डेढ़ किलोमीटर का मार्ग पूरी तरह से कच्चा है। बारिश में पूरी सड़क पर कीचड़ रहता है। पत्थर भी बड़े-बड़े हैं। इससे पैदल चलना मुश्किल है। इसके अलावा इस सड़क के दोनों ओर गन्ना बाड़ी होने के कारण यहां जंगली सूअरों का आतंक रहता है। इससे बच्चों के साथ कभी भी कोई घटना-दुर्घटना हो सकती है। ग्रामवासियों ने अधिकारियों से मांग की है कि इस गलती को तत्काल सुधारा जाएं ताकि उनके बच्चों का भविष्य खतरे में न पड़े।
अधिकारियों ने नहीं किया फोन रिसीव
इस संबंध में अधिकारियों से चर्चा करने के लिए 'राष्ट्रीय जनादेश' ने जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुशवाह और शिक्षा विभाग के योजना अधिकारी सुबोध शर्मा से चर्चा का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया, जिससे उनसे चर्चा नहीं हो पाई।

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