बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश) (E-Gram Yantri App)। अब ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों को ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के सब इंजीनियरों की मनमानी नहीं झेलना होगा और न ही उनके चक्कर काटने होंगे। आईएएस और जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन द्वारा किया गए एक नवाचार से अब पंचायतों के सारे टेक्नीकल काम फटाफट हो सकेंगे। यह नवाचार है ई-ग्राम यंत्री एप। 

ग्राम पंचायतों में होने वाले विभिन्न निर्माण कार्यों के टेक्नीकल कार्यों जैसे एस्टीमेट, टीएस, मूल्यांकन और सीसी जारी करने के लिए ग्राम पंचायतों को आरईएस के सब इंजीनियरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके लिए सरपंच, सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों (जीआरएस) को सब इंजीनियरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे। कई बार वे मिलते नहीं थे और कई बार मिलने के बाद भी यह कार्य लंबे समय तक अटके पड़े रहते थे। इससे एक ओर जहां सरपंच, सचिव और जीआरएस को परेशान होना पड़ता था वहीं पंचायतों का विकास भी बाधित होता था। 

सीईओ अक्षत जैन ने बनवाया एप 

इन्हीं समस्याओं से पंचायतों को निजात दिलाने जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने इन सभी कार्यों को ऑनलाइन करने के लिए ई-ग्राम यंत्री एप बनवाया है। इसके साथ ही इसकी वेबसाइट भी बनाई गई है। भोपाल में आला अफसरों और प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों के समक्ष इसका प्रेजेंटेशन भी दिया जा चुका है। इसे चलाने के लिए जिले में सभी को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। उनकी यूजर आईडी व पासवर्ड भी बनाकर दिए जा चुके हैं। 

जल्द लिया जाएगा इस एप से कार्य 

इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन ने बताया कि इस एप को अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया है। जल्द ही इसी के जरिए ही यह सभी काम शुरू कर दिए जाएंगे। इसके लिए 8 से 10 ग्राम पंचायतों के अलग-अलग कलस्टर बनाए गए हैं। जिले में कुल 48 कलस्टर बनाए गए हैं। 

इस तरह करेगा यह एप कार्य 

सीईओ श्री जैन ने बताया कि अब एस्टीमेट बनाने से लेकर टीएस, मूल्यांकन, सीसी जारी करने के लिए इस एप के जरिए रिक्वेस्ट भेजना होगा। रिक्वेस्ट कहां से और कब की गई यह केवल पंचायतों और सब इंजीनियरों को ही नहीं बल्कि सहायक यंत्री, कार्यपालन यंत्री, जनपद सीईओ और जिला पंचायत सीईओ भी ऑनलाइन देख सकेंगे। 

एक्शन टेकन रिपोर्ट भी साफ दिखेगी

रिक्वेस्ट के जवाब में सब इंजीनियरों ने क्या किया, कितने दिनों में किया, यह सब भी देखा जा सकेगा। यदि कोई लेटलतीफी करता है तो यह भी ट्रैक रिकॉर्ड में साफ नजर आ जाएगा। यदि की गई रिक्वेस्ट में कोई रिक्वायरमेंट है तो उसकी डिमांड भी सब इंजीनियर को एप पर ही करना होगा। इस व्यवस्था से कोई भी सब इंजीनियर कार्यों में विलंब नहीं कर सकेगा। 

मोबाइल में करवाया जा चुका इंस्टाल 

जिले में 554 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी पंचायतों के सचिवों और जीआरएस के मोबाइल में यह एप इंस्टाल करवा दिया गया है। यह व्यवस्था लागू होने के बाद न तो कार्यों में लेटलतीफी की जा सकेगी और न ही सरपंच-सचिवों को सब इंजीनियरों के चक्कर ही काटने होगे। यदि यह व्यवस्था जिले में सफल होती है तो इसे पूरे प्रदेश में और अन्य विभागों में भी लागू किया जा सकता है।