Ram Janmabhoomi Temple Flag: रामराज की पुनर्स्थापना का संदेश देगी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की ध्वजा: मोहन नागर
Ram Janmabhoomi Temple Flag: त्रेता का उत्सव राघव के जन्म का था और कलियुग का यह समारोह उनके मंदिर निर्माण के पूर्ण होने की घोषणा है। रघुकुल तिलक के भव्य मंदिर शिखर पर जब ध्वजा लहराएगी, तो यह संसार को संदेश देगी कि अयोध्या में रामराज की पुनर्स्थापना हो चुकी है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण पूर्ण होने बाद मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की शुभ पंचमी 25 नवंबर को भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व संघ के पूज्य सरसंघचालक मोहन भागवत जी द्वारा राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराई जायेगी।
मंदिर के शिखर पर फहराई जाने वाली यह धर्म ध्वजा विशेष है। रामायण व रामचरित मानस से इसकी परिकल्पना ली गई है। इस ध्वज में जिन प्रतीकों का समावेश किया गया है, वह बड़ा ही दिव्य है। विधि-विधान के साथ फहराए जाने वाले इस ध्वज में सम्पूर्ण राष्ट्र को बांधने की क्षमता है।

इस ध्वजा पर बने प्रतीक चिन्हों का भी विशेष अर्थ है। ये ध्वजा केसरिया रंग की है, जिसे ज्वाला, तप, त्याग व प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। यह रंग सनातन का भी प्रतीक है। इस ध्वजा पर सूर्यदेव भी अंकित हैं, जो श्रीराम के सूर्यवंश का प्रतीक है। ध्वजा पर अंकित ? परमात्मा का प्रथम नामाक्षर एवं चेतना व शाश्वत सत्य का प्रतिनिधित्व करता है। इस धर्म ध्वजा पर कोविदार वृक्ष भी अंकित है, जो कि अयोध्या के राजवंशीय राज चिन्ह के रूप में जाना जाता है। यह ध्वजा विश्व की मंगलकामना के लिए है। धर्म का संदेश देने के साथ ध्वज हमारे सनातन में विजय व यश का प्रतीक भी है।
किसी भी मंदिर पर ध्वजारोहण उसके निर्माण पूर्ण होने पर किया जाता है। सनातन की परम्परा भी रही है कि किसी कार्य के पूर्ण होने पर ध्वजारोहण करते हैं। उसी प्रकार जब श्रीराम मंदिर के निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है तो यह उसकी पूर्णाहुति है और शिखर पर फहराए जाने वाली धर्म ध्वजा इसी का प्रतीक है।
श्रीराम मंदिर की यह ध्वजा 191 फीट की कुल ऊँचाई में 160 फीट मंदिर के मुख्य शिखर की है और उसके ऊपर लगाया गया ध्वज मंदिर को नई ऊँचाई और प्रतिष्ठा देगा।
ध्वजारोहण श्रीराम मंदिर के निर्माण की सम्पूर्ण यात्रा का न केवल समापन है, अपितु लगभग 500 वर्ष पहले प्रारंभ हुए संघर्षकाल की यह गौरवपूर्ण उपलब्धि है। इसीलिए इसे एक ऐतिहासिक पल के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ इतिहास के बड़े कलंक का नाश भी हो जायेगा और अयोध्या उऋण हो जायेगी।
(लेखक मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं)

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