रैपिड सपोर्ट फोर्सेज ने यूएई से मिले चीन हाथियारों से किया कत्लेआम.....2,000 से अधिक निहत्थे नागरिकों की हत्या
अबूधाबी । सूडान में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) और सूडानी सेना (एसएएफ) के बीच चल रहे गृहयुद्ध ने भयानक रूप ले लिया है, खासकर दारफुर क्षेत्र के अल-फशर शहर में। सूडानी सेना के सहयोगी सैन्य समूह जॉइंट फोर्स ने आरोप लगाया है कि आरएसएफ ने 26 और 27 अक्टूबर को अल-फशर शहर में 2,000 से अधिक निहत्थे नागरिकों की हत्या कर दी है, जिनमें ज्यादातर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। येल यूनिवर्सिटी के ह्यूमेनिटेरियन रिसर्च लैब (एचआरएल ) के सैटेलाइट विश्लेषण में कहा गया है कि यह गैर-अरब समुदायों (जैसे फुर, जाघावा और बर्टी) का जानबूझकर किया गया जातीय सफाया है। एचआरएल के सैटेलाइट विश्लेषण में शहर के चारों ओर लाशों के समूह और खून से सनी लाल रंग की मिट्टी दिखाई दे रही है, जो अंतरिक्ष से भी देखी जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, आरएसएफ के लड़ाके घर-घर जाकर तलाशी अभियान के बहाने नागरिकों को गोली मार रहे हैं, और एक वीडियो में महिलाओं और बच्चों को कतार में बिठाकर सामने से अंधाधुंध गोलियां बरसाई जाती दिख रही हैं। 18 महीनों की घेराबंदी के बाद आरएसएफ ने अल-फशर शहर पर कब्जा कर लिया है और अब उनका दारफुर क्षेत्र के सभी पाँचों राज्य मुख्यालयों पर नियंत्रण हो गया है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने आरएसएफ को चीनी हथियारों और ड्रोन की आपूर्ति में भारी इजाफा किया है। लेकिन यूएई इन आरोपों से इंकार करता रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अबू धाबी से चीनी रेनबो सीरीज के ड्रोन, छोटे हथियार, भारी मशीनगन, तोपें, वाहन और गोला-बारूद की भारी मात्रा में आरएसएफ को सप्लाई की जा रही है। दारफुर में नागरिकों को मारने के लिए इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने संभावित जातीय सफाया करार दिया है।
आरएसएफ के नेता मोहम्मद हमदान दगालो (हेमेटी) को यूएई का घनिष्ठ सहयोगी बताया जाता है, जिन्होंने दुबई में अपना बिजनेस हेडक्वार्टर स्थापित किया है। आरएसएफ की आर्थिक जड़ें दारफुर की खदानों से अवैध सोने की दुबई के रास्ते तस्करी से मजबूत हुई हैं। यह जानकारी सूडान में जारी संकट और नागरिक हत्याओं की गंभीरता को उजागर करती है, साथ ही इसमें बाहरी देशों की कथित भागीदारी पर भी सवाल उठाती है।

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