छत्तीसगढ़ का लोहा फिर बना गौरव, INS विक्रांत के बाद अब मिजोरम रेलवे ब्रिज
रायपुर/आइजोल। भारतीय रेलवे ने मिजोरम को ऐतिहासिक सौगात दी है। आजादी के बाद पहली बार मिजोरम की राजधानी आइजोल रेल नेटवर्क से जुड़ने जा रही है। इस कनेक्टिविटी को संभव बनाने वाला देश का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के लोहे से तैयार हुआ है।
भिलाई स्टील का 30-35 हजार टन लोहा
आइजोल में बने इस पियर ब्रिज के लिए BSP से 30-35 हजार टन लोहा भेजा गया था। यह ब्रिज कुतुबमीनार से भी ऊंचा है। इससे पहले छत्तीसगढ़ का लोहा चिनाब ब्रिज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और INS विक्रांत जैसे राष्ट्रीय परियोजनाओं में भी इस्तेमाल हो चुका है।
रेलवे इंजीनियरिंग सपोर्ट भी छत्तीसगढ़ से
बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के तहत ट्रैक, टनल और ब्रिज निर्माण में बिलासपुर जोन की इंजीनियरिंग टीमें, मशीनरी और तकनीकी सपोर्ट भी भेजा गया था। रेलपांत, गर्डर और अन्य स्टील मटेरियल छत्तीसगढ़ से सप्लाई हुआ।
7 घंटे का सफर अब 3 घंटे में
करीब 10 साल में तैयार हुए इस प्रोजेक्ट से यात्रा का समय काफी कम होगा। अब 7 घंटे का सफर महज 3 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। आने वाले समय में यह रेल लाइन म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को नई दिशा मिलेगी।
2014 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत 2014 में 5,020 करोड़ की लागत से हुई थी। हालांकि निर्माण में कुल 8,071 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसमें 51.38 किलोमीटर लंबी रेल लाइन, 48 सुरंगें और कई ब्रिज शामिल हैं।
भूकंप रोधी तकनीक से डिजाइन
इस रेल लाइन पर बने पुलों में से एक 104 मीटर ऊंचा है, जिसे भूकंप रोधी तकनीक से डिजाइन किया गया है। चुनौतीपूर्ण भूभाग में इस रेल लाइन का निर्माण भारतीय रेलवे के लिए बड़ी उपलब्धि है।

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