हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: केंद्र की 30 निराधार याचिकाएँ कर रहीं न्यायिक समय की बर्बादी, ₹3 लाख का भारी जुर्माना ठोका”
जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जबलपुर आयुध कारखाने द्वारा दायर 30 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। ये याचिकाएं कारखाने के कर्मचारियों के पक्ष में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश के खिलाफ थीं। न्यायालय ने केंद्र सरकार पर 'आधारहीन' याचिकाएं दायर करने के लिए 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
ओवरटाइम में भत्ता शामिल करने को याचिकाएं
छठे वेतन आयोग ने कर्मचारियों के ओवरटाइम (OT) भत्ते की गणना में मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और छोटा परिवार भत्ता शामिल करने को कहा था। लेकिन, जब छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की गईं, तो ऐसा नहीं किया गया। इसलिए, मध्य प्रदेश के आयुध कारखानों के कई कर्मचारियों ने CAT, जबलपुर में OT राशि के लिए याचिका दायर की थी।
कोर्ट में दाखिल की 30 से अलग-अलग याचिकाएं
ट्रिब्यूनल ने 24 मार्च, 2025 को अपने आदेश में कर्मचारियों को बकाया राशि का भुगतान करने को कहा था। हालांकि, जबलपुर आयुध कारखाने की फील्ड यूनिट ने CAT के फैसले को चुनौती देते हुए 30 अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं। गुरुवार को याचिकाओं की सुनवाई के दौरान, जस्टिस विवेक अग्रवाल और ए.के. सिंह की खंडपीठ ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
हाईकोर्ट ने लगाया जुर्माना
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार पर प्रत्येक याचिका के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि कर्मचारियों के कल्याण कोष में जाएगी। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने 'बेबुनियाद' याचिकाएं दायर कीं। छठे वेतन आयोग ने कहा था कि 'हाउस रेंट अलाउंस, ट्रैवलिंग अलाउंस और स्माल फैमिली अलाउंस' को ओवरटाइम में जोड़ा जाए।

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