चातुर्मास शुरू, सो गए देव... अब 4 महीने नहीं बजेगी शहनाई, नवंबर तक ठहर जाएगा हर शुभ काम!
बाड़मेर. बाड़मेर जिले में आषाढ़ शुक्ल एकादशी का दिन आस्था, परंपरा और प्रतीक्षा का संदेश लेकर आया है. मान्यता है कि इसी दिन पालनहार भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं. जैसे ही भोर में देवशयनी एकादशी का समय आया, पूरे इलाके में धार्मिक श्रद्धा का भाव जाग उठा. मंदिरों में विशेष पूजा हुई, कथा-प्रवचनों का आयोजन हुआ और गांव-गांव में श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान विष्णु को शयन कराने की परंपरा निभाई. इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया है, जिससे एक ओर धार्मिक अनुशासन का भाव है, तो दूसरी ओर लोगों के मन में विवाह और दूसरे शुभ अवसरों के लिए इंतजार भी शुरू हो गया है.
गांव के बुजुर्गों और पंडितों ने युवा पीढ़ी को इस चार माह की अवधि की धार्मिक महत्ता समझाई. कई स्थानों पर तुलसी पौधे के पास दीप जलाकर भगवान विष्णु के शयन के प्रतीक रूप में पवित्रता की शपथ ली गई. इसी के साथ यह भी तय हो गया कि अब शादी-ब्याह जैसे आयोजनों की चहल-पहल नहीं दिखेगी, बाजारों में भी सन्नाटा रहेगा और मांगलिक आयोजनों की गूंज नवंबर तक स्थगित रहेगी.
अब न सजेगा मंडप, न बजेगी शहनाई
देवशयनी एकादशी के साथ ही हर साल की तरह इस बार भी शादी-ब्याह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर चार महीने का विराम लग गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु जब विश्राम में चले जाते हैं तो इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू नहीं किया जाता. यह काल ‘चातुर्मास’ कहलाता है, जो देवउठनी एकादशी तक चलता है. इस अवधि में कोई वैवाहिक आयोजन नहीं होता, जिससे न केवल पारिवारिक कार्यक्रमों की योजना स्थगित होती है, बल्कि सामाजिक गतिविधियां भी सीमित हो जाती हैं.
नवम्बर-दिसंबर में यह रहेंगे विवाह मुहूर्त
गुरु पंडित ओमप्रकाश जोशी के अनुसार, भगवान विष्णु 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन शयन से जागेंगे. इसके अगले दिन तुलसी विवाह के साथ ही शुभ कार्यों की फिर से शुरुआत हो जाएगी. नवंबर में 2, 3, 8, 12, 15, 16, 22, 23 और 25 तारीख को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं, जबकि दिसंबर में 4, 5 और 6 तारीख को विवाह हो सकेंगे. ऐसे में जिन परिवारों ने पहले से तैयारियां कर रखी थीं, उन्हें अब चार महीने का इंतजार करना होगा.
खरीददारी पर रहेगा असर, बाजार में आएगी मंदी
देवशयनी एकादशी के बाद मांगलिक कार्यों के रुक जाने का असर बाजारों पर साफ नजर आता है. शादी-ब्याह की खरीददारी बंद हो जाने से कपड़ा, गहने, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सजावट की सामग्री, फर्नीचर और किचन से जुड़ी चीजों की मांग में भारी गिरावट आती है. व्यापारी वर्ग इस समय को ‘ऑफ सीजन’ मानता है और खुद को आगामी सीजन की तैयारियों में लगा देता है. इस साल भी बाड़मेर के बाजारों में मंदी की आहट सुनाई देने लगी है. दुकानदारों को उम्मीद है कि देवउठनी एकादशी के बाद बाजार फिर से गुलजार होंगे.

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