इंदौर बावड़ी हादसा: 36 मौतें, दोनों आरोपी बरी
इंदौर। इंदौर के चर्चित बावड़ी हादसे में 36 लोगों की मौत के मामले में जिला कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। विडंबना यह रही कि पुलिस ने इतने गंभीर मामले की जांच सही तरीके से नहीं की। कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस को नगर निगम के जिम्मेदारों को भी आरोपी बनाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वहीं, गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ भी अपराध साबित नहीं हो सका।
इस मामले में जूनी इंदौर पुलिस ने श्री बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सेवाराम पिता गोकुलदास गालानी और सचिव मुरली पिता टेउमल के खिलाफ 36 लोगों की मौत के मामले में गैरइरादतन हत्या सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें 22 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। तब से दोनों ही जेल में हैं।
आरोपियों के एडवोकेट राघवेंद्र सिंह बैस ने बताया कि, मामले की मजिस्ट्रियल जांच हुई थी। इसके बाद पुलिस ने चालान पेश किया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने सिर्फ ट्रस्ट के इन दोनों पदाधिकारियों को ही आरोपी बनाया जबकि नगर निगम के जोन से संबंधित जिम्मेदारों को आरोपी ही नहीं बनाया। मामले में 33 लोगों की गवाही हुई। इसमें सामने आया कि ट्रस्ट के अध्यक्ष और सचिव की इसमें कोई लापरवाही नहीं है।
कोर्ट ने विवेचना अधिकारियों और निगम अधिकारियों की लापरवाही को लेकर टिप्पणी की है। केस में पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की। केस में ट्रस्ट के लोगों की लापरवाही इसलिए नहीं मानी क्योंकि उन्हें जानकारी ही नहीं थी कि वहां बावड़ी है। ट्रस्ट का घटना से कोई लेना-देना ही नहीं था। घटना रामनवमी के दिन हुई थी। इस दिन ट्रस्ट का वहां कोई आयोजन नहीं था। वहां त्योहार के कारण पूजा-पाठ थी।